स्वास्थ्य प्रत्येक मानव का सबसे मौलिक, अनिवार्य और गरिमापूर्ण प्राकृतिक अधिकार है। किसी भी परिवार के लिए एक गंभीर बीमारी न केवल शारीरिक पीड़ा का कारण बनती है, बल्कि वह उस परिवार की जीवन भर की संचित बचत, मकान, जमीन और जेवरों को बिकवाकर उसे गंभीर कर्ज और गरीबी के अंतहीन भंवर में धकेल देती है। भारत में वर्षों से ‘आउट-ऑफ-पॉकेट एक्सपेंडिचर’ (अपनी जेब से चिकित्सा खर्च) स्वास्थ्य प्रणाली की सबसे दुखद त्रासदी रही है जिसके कारण प्रतिवर्ष 6 करोड़ से अधिक मध्यमवर्गीय और गरीब नागरिक केवल अस्पताल के भारी-भरकम बिलों को चुकाने के चक्कर में गरीबी रेखा के नीचे चले जाते थे। कैंसर, हृदय रोग, न्यूरोसर्जरी, गुर्दा प्रत्यारोपण और कूल्हा-घुटना प्रत्यारोपण जैसी जटिल शल्य चिकित्साएं गरीब की पहुंच से इतनी दूर थीं कि अधिकांश निर्धन लोग इलाज के अभाव में दम तोड़ने के लिए विवश थे।
इस अमानवीय विवशता को हमेशा के लिए समाप्त करने और देश के प्रत्येक नागरिक को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और विश्वस्तरीय चिकित्सा सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से भारत सरकार ने 23 सितंबर 2018 को रांची (झारखंड) से ‘आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ (AB-PMJAY) का ऐतिहासिक शुभारंभ किया। इसे विश्व बैंक और वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा ‘मोदीकेयर’ और विश्व की सबसे बड़ी सरकारी वित्तपोषित स्वास्थ्य बीमा योजना (World’s Largest Government-Financed Health Assurance Scheme) घोषित किया गया है। यह योजना देश के 12 करोड़ से अधिक निर्धन, वंचित और ग्रामीण परिवारों (लगभग 55 करोड़ से अधिक नागरिकों) को प्रति वर्ष प्रति परिवार 5 लाख रुपये तक का पूर्णतः ‘कैशलेस और पेपरलेस’ द्वितीयक व तृतीयक अस्पताल उपचार प्रदान करती है। हाल ही में केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के देश के सभी वरिष्ठ नागरिकों को (चाहे उनकी पारिवारिक आय कुछ भी हो) 5 लाख रुपये के अतिरिक्त स्वास्थ्य सुरक्षा दायरे में सम्मिलित कर लिया है। इस विस्तृत शोधपरक आलेख में हम आयुष्मान भारत के दोनों स्तंभों, पात्रता की पहचान, आयुष्मान कार्ड (गोल्डन कार्ड) बनाने की ऑनलाइन प्रक्रिया, 1,949 से अधिक उपचार पैकेजों, संबद्ध सरकारी व निजी अस्पतालों में भर्ती प्रक्रिया, क्लेम सेटलमेंट और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) का संपूर्ण वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं।
आयुष्मान भारत के दो मुख्य स्तंभ: स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र और पीएम-जय
आयुष्मान भारत योजना को स्वास्थ्य सेवा की संपूर्ण निरंतरता (Continuum of Care) को सुनिश्चित करने के लिए दो परस्पर पूरक घटकों में रूपांतरित किया गया है:
1. प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल – आयुष्मान आरोग्य मंदिर (पूर्व में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स): देश भर के 1.6 लाख से अधिक उप-स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) को आधुनिक ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ के रूप में उन्नत किया गया है। इनका मुख्य उद्देश्य बीमारियों के होने से पहले ही उनकी रोकथाम और प्रारंभिक स्तर पर पहचान करना है। यहां उच्च रक्तचाप, मधुमेह, ओरल, स्तन व गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की निःशुल्क स्क्रीनिंग, आवश्यक दवाएं, और टेली-कंसल्टेशन (ई-संजीवनी) के माध्यम से देश के शीर्ष डॉक्टरों का परामर्श गांव में ही निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। इसके अतिरिक्त योग सत्र और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा दिया जाता है।
2. द्वितीयक एवं तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY): यह योजना का बीमा घटक है जिसके तहत गंभीर बीमारियों के उपचार हेतु अस्पताल में भर्ती होने पर 5 लाख रुपये का कैशलेस कवर दिया जाता है। यह योजना देश के किसी भी कोने में रहने वाले नागरिक को देश भर के किसी भी राज्य में स्थित संबद्ध अस्पताल में उपचार कराने की ‘पोर्टेबिलिटी’ (Portability) प्रदान करती है। आधिकारिक स्वास्थ्य नीतियों और योजनाओं का राष्ट्रीय संदर्भ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध है।
पात्रता निर्धारण: सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC 2011) और विस्तार
पीएम-जय योजना में लाभ प्राप्त करने के लिए किसी औपचारिक पूर्व-आवेदन या प्रीमियम भुगतान की आवश्यकता नहीं होती; बल्कि इसके लाभार्थी सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना 2011 (SECC 2011) के अभाव और व्यवसाय के मानकों के आधार पर स्वतः चुने गए हैं:
ग्रामीण क्षेत्रों में पात्रता मानदंड (D1 से D7 वंचित श्रेणियां):
1. कच्चे मकान में रहने वाले परिवार जिनकी छत और दीवारें कच्ची हैं।
2. वे परिवार जिनमें 16 से 59 वर्ष की आयु का कोई वयस्क पुरुष सदस्य नहीं है।
3. महिला-प्रधान परिवार जिनमें कोई 16 से 59 वर्ष का वयस्क पुरुष नहीं है।
4. वे परिवार जिनमें कोई दिव्यांग सदस्य है और कोई सक्षम वयस्क सदस्य नहीं है।
5. अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के परिवार।
6. भूमिहीन परिवार जिनकी आजीविका का मुख्य साधन शारीरिक दिहाड़ी मजदूरी है।
7. बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराए गए परिवार, मैला ढोने वाले और आदिम जनजातीय समूह (PVTG)।
शहरी क्षेत्रों में 11 व्यावसायिक श्रेणियां: कचरा बीनने वाले, भिखारी, घरेलू कामगार (घरेलू नौकर), सड़क पर सामान बेचने वाले फेरीवाले/रेहड़ी-पटरी वाले, निर्माण मजदूर, प्लंबर, राजमिस्त्री, पेंटर, सुरक्षा गार्ड, वेल्डर, रिक्शा चालक, कुली, दर्जी, धोबी, और छोटे मैकेनिक इसके सीधे पात्र हैं। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत जारी राशन कार्डों और राज्य सरकारों के डेटाबेस को जोड़कर लाभार्थियों का लगातार विस्तार किया गया है।
70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को 5 लाख का विशेष स्वास्थ्य कवच
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सितंबर 2024 में एक अत्यंत युगांतरकारी और मानवीय निर्णय लेते हुए देश के सभी 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को (उनकी आर्थिक स्थिति, जाति, धर्म या आय वर्ग की परवाह किए बिना) आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये के निःशुल्क स्वास्थ्य कवर की ऐतिहासिक सौगात दी है।
इस विस्तार की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
– देश के लगभग 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिक (4.5 करोड़ परिवारों में) इससे सीधे लाभान्वित हो रहे हैं।
– 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को एक विशिष्ट ‘आयुष्मान वय वंदना कार्ड’ (Ayushman Vaya Vandana Card) जारी किया जा रहा है।
– यदि कोई परिवार पहले से ही आयुष्मान योजना के तहत 5 लाख का लाभ ले रहा है, तो उस परिवार के 70 वर्ष से अधिक के बुजुर्ग सदस्य को परिवार के 5 लाख के अतिरिक्त ‘अलग से 5 लाख रुपये’ का टॉप-अप कवर प्रदान किया जाएगा जिसे परिवार का कोई अन्य सदस्य साझा नहीं कर सकेगा।
– यदि कोई वरिष्ठ नागरिक केंद्र सरकार की अन्य स्वास्थ्य योजनाओं (जैसे CGHS, ECHS, या रेलवे स्वास्थ्य सेवा) का पहले से लाभ ले रहे हैं, तो उन्हें यह स्वतंत्रता दी गई है कि वे या तो अपनी मौजूदा योजना जारी रख सकते हैं अथवा आयुष्मान भारत का चयन कर सकते हैं। निजी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी रखने वाले बुजुर्ग भी इसके पूर्ण पात्र हैं।
प्रति परिवार 5 लाख रुपये का कैशलेस स्वास्थ्य कवच देश के निर्धन और वरिष्ठ नागरिकों को गरिमापूर्ण जीवन और उपचार सुरक्षा प्रदान कर रहा है।
आयुष्मान कार्ड (Ayushman Card) ऑनलाइन बनाने की संपूर्ण प्रक्रिया
आयुष्मान कार्ड को लोकप्रिय रूप से ‘गोल्डन कार्ड’ भी कहा जाता है। यह प्लास्टिक पीवीसी कार्ड उपचार के समय अस्पताल में प्रस्तुत किया जाता है। अब सरकार ने बिचौलियों को पूरी तरह समाप्त कर नागरिकों को स्वयं अपने मोबाइल से घर बैठे आयुष्मान कार्ड बनाने की ‘सेल्फ-रजिस्ट्रेशन’ सुविधा प्रदान कर दी है:
आयुष्मान ऐप (Ayushman App) या ‘लाभार्थी पोर्टल’ (beneficiary.nha.gov.in) द्वारा कार्ड बनाने के चरण:
1. पोर्टल खोलें और ‘Beneficiary’ विकल्प चुनकर अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें और ओटीपी सत्यापित करें।
2. राज्य, योजना (PMJAY), अपना जिला और खोजने का माध्यम (आधार नंबर, पारिवारिक आईडी या राशन कार्ड नंबर) चुनें।
3. परिवार के सभी सदस्यों की सूची स्क्रीन पर आ जाएगी। जिन सदस्यों का कार्ड नहीं बना है, उनके नाम के आगे ‘Action / e-KYC’ का विकल्प दिखेगा।
4. ‘आधार ओटीपी’ अथवा ‘फेस ऑथेंटिकेशन’ का चयन करें। कैमरे के सामने पलकें झपकाकर चेहरा स्कैन करें या आधार पर आया 6-अंकों का ओटीपी दर्ज करें।
5. सिस्टम स्वतः आधार कार्ड से फोटो, नाम, जन्मतिथि और पता ले लेगा। अपना मोबाइल नंबर और पिन कोड दर्ज कर सबमिट करें।
6. सत्यापन सफल होते ही ई-केवाईसी पूर्ण हो जाएगी और 5 से 10 मिनट के भीतर ‘Download Card’ का विकल्प आ जाएगा जहां से आप अपना रंगीन आयुष्मान कार्ड पीडीएफ फॉर्मेट में डाउनलोड कर सकते हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के आधिकारिक पोर्टल पर संबद्ध अस्पतालों की सूची और पात्रता की जांच राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के पोर्टल पर उपलब्ध है।
उपचार पैकेज और स्वास्थ्य सुविधाएं: 1,949 से अधिक बीमारियां कवर
आयुष्मान भारत योजना के तहत 27 विभिन्न विशिष्टताओं (Specialties) में 1,949 से अधिक मेडिकल और सर्जिकल उपचार प्रक्रियाएं शामिल की गई हैं। इस योजना की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी विशेषता यह है कि इसमें कोई भी ‘पूर्व-विद्यमान बीमारी’ (Pre-Existing Disease) बाहर नहीं रखी गई है; अर्थात कार्ड बनने के पहले ही दिन से सभी पुरानी और गंभीर बीमारियां स्वतः कवर हो जाती हैं। इसके लिए कोई प्रतीक्षा अवधि (Waiting Period) नहीं होती।
प्रमुख कवर की जाने वाली जटिल बीमारियां और प्रक्रियाएं:
– ऑन्कोलॉजी (कैंसर उपचार): कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, और सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के सभी चक्र।
– कार्डियोलॉजी (हृदय रोग): एंजियोप्लास्टी, स्टेंट डालना, कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग (CABG), और पेसमेकर प्रत्यारोपण।
– नेफ्रोलॉजी: गुर्दे की विफलता के मरीजों के लिए नियमित हीमोडायलिसिस और किडनी ट्रांसप्लांट।
– ऑर्थोपेडिक्स: गंभीर सड़क दुर्घटनाओं में हड्डियों की जटिल सर्जरी, टोटल हिप और नी रिप्लेसमेंट।
– न्यूरोसर्जरी: ब्रेन ट्यूमर सर्जरी, सिर की चोटों का सघन उपचार।
– बाल रोग, नवजात शिशु गहन चिकित्सा (NICU) और प्रसव (सिजेरियन व सामान्य)।
योजना के तहत अस्पताल में भर्ती होने से 3 दिन पूर्व की सभी जांचें, दवाएं और भर्ती के उपरांत अस्पताल से डिस्चार्ज होने के 15 दिनों तक की सभी आवश्यक दवाएं और अनुवर्ती (Follow-up) परामर्श पूर्णतः निःशुल्क प्रदान किए जाते हैं।
अस्पताल में भर्ती और कैशलेस उपचार की व्यावहारिक प्रक्रिया
जब किसी पात्र लाभार्थी को उपचार की आवश्यकता होती है, तो उसे योजना के तहत संबद्ध किसी भी सरकारी अथवा निजी अस्पताल में जाना होता है। देश भर के 29,000 से अधिक अस्पताल (जिनमें एम्स दिल्ली, पीजीआई चंडीगढ़ सहित शीर्ष कॉर्पोरेट अस्पताल अपोलो, मैक्स, फोर्टिस आदि शामिल हैं) इस योजना से जुड़े हैं।
अस्पताल में उपचार की चरणबद्ध प्रक्रिया:
1. अस्पताल के मुख्य द्वार पर स्थित ‘आयुष्मान भारत सहायता केंद्र’ (Ayushman Mitra Helpdesk) पर जाएं।
2. वहां तैनात ‘आयुष्मान मित्र’ को अपना आयुष्मान कार्ड, आधार कार्ड या राशन कार्ड दिखाएं।
3. आयुष्मान मित्र बायोमेट्रिक या आधार ओटीपी के माध्यम से लाभार्थी की पहचान सत्यापित कर रोगी को संबंधित डॉक्टर के पास भेजता है।
4. डॉक्टर द्वारा भर्ती की संस्तुति करने पर अस्पताल द्वारा ऑनलाइन ‘प्री-ऑथराइजेशन’ (पूर्व-स्वीकृति) अनुरोध राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण को भेजा जाता है जो कुछ ही घंटों में डिजिटल रूप से स्वीकृत हो जाता है।
5. रोगी का संपूर्ण उपचार, सर्जरी, आईसीयू, भोजन, दवाएं और प्रत्यारोपण (इम्प्लांट्स) पूर्णतः कैशलेस होते हैं; मरीज के परिजनों से एक भी रुपया नहीं लिया जा सकता।
6. डिस्चार्ज के समय अस्पताल राज्य स्वास्थ्य एजेंसी को ऑनलाइन बिल जमा करता है और सरकार सीधे अस्पताल के खाते में निर्धारित पैकेज दर के अनुसार भुगतान कर देती है।
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) और आभा (ABHA) आईडी
स्वास्थ्य सेवाओं को 21वीं सदी के डिजिटल युग से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार ने ‘आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन’ (ABDM) आरंभ किया है। इसका उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक का एक एकीकृत, सुरक्षित और डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड नेटवर्क स्थापित करना है।
इसके अंतर्गत प्रत्येक नागरिक की 14-अंकों की विशिष्ट ‘आभा आईडी’ (Ayushman Bharat Health Account – ABHA ID) बनाई जा रही है। आभा आईडी एक डिजिटल स्वास्थ्य लॉकर की तरह कार्य करती है। जब भी कोई नागरिक किसी डॉक्टर, लैब या अस्पताल में जाता है, उसकी सभी जांच रिपोर्टें (ब्लड टेस्ट, एमआरआई, सीटी स्कैन), दवाओं के पर्चे (प्रिस्क्रिप्शन), और डिस्चार्ज समरी डिजिटल रूप से उसकी आभा आईडी से स्वतः लिंक हो जाती हैं। जब मरीज किसी अन्य शहर या विशेषज्ञ डॉक्टर के पास जाता है, तो उसे भारी-भरकम कागजी फाइलों को साथ ले जाने की आवश्यकता नहीं होती; वह अपनी डिजिटल सहमति (Consent) देकर डॉक्टर को सीधे अपनी स्क्रीन पर पुराना मेडिकल इतिहास दिखा सकता है। इससे गलत निदान का खतरा समाप्त होता है और अनावश्यक दोहराव वाली जांचों से समय और धन की भारी बचत होती है।
भारत की प्रमुख स्वास्थ्य बीमा एवं कल्याण योजनाओं का समग्र तुलनात्मक विश्लेषण
भारत में विभिन्न वर्गों और नागरिकों के लिए कई स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाएं कार्यरत हैं। आयुष्मान भारत (PM-JAY), केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS), कर्मचारी राज्य बीमा (ESIC) और पारंपरिक निजी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों की अपनी-अपनी सीमाएं और लाभ हैं। नीचे दी गई तालिका में इन चारों प्रमुख प्रणालियों का विस्तृत तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है:
| तुलना मानक | आयुष्मान भारत (AB-PMJAY) | सीजीएचएस (CGHS) | निजी स्वास्थ्य बीमा (Private Mediclaim) |
| लक्षित लाभार्थी वर्ग | देश के 55 करोड़ गरीब नागरिक + 70 वर्ष से ऊपर के सभी बुजुर्ग | केंद्र सरकार के सेवारत कर्मचारी एवं सेवानिवृत्त पेंशनभोगी | प्रीमियम चुकाने में सक्षम सामान्य शहरी एवं संपन्न नागरिक |
| प्रीमियम की लागत | शत-प्रतिशत निःशुल्क (सरकार द्वारा वहन, नागरिक से 0 रु) | वेतन/पेंशन से मासिक नाममात्र अंशदान कटौती | अत्यधिक महंगा (प्रतिवर्ष 15,000 से 40,000 रुपये तक) |
| वार्षिक बीमा राशि | 5,00,000 रुपये प्रति परिवार (बुजुर्गों हेतु पृथक 5 लाख) | सरकारी नियमों के अनुसार पैकेज दर पर असीमित | चुनी गई पॉलिसी राशि के अनुसार (3 लाख से 25 लाख) |
| पूर्व-विद्यमान बीमारियां | डे-1 से शत-प्रतिशत कवर (शून्य प्रतीक्षा अवधि) | डे-1 से सभी बीमारियां कवर | 2 से 4 वर्ष की कठोर प्रतीक्षा अवधि (Waiting Period) |
| अस्पताल नेटवर्क | देश भर के 29,000+ सरकारी व निजी अस्पताल (अखिल भारतीय पोर्टेबिलिटी) | केवल सीजीएचएस अधिसूचित शहरों के संबद्ध अस्पताल | बीमा कंपनी के टीपीए नेटवर्क अस्पताल |
यह तुलनात्मक विश्लेषण स्पष्ट करता है कि आयुष्मान भारत योजना न केवल पैमाने में अभूतपूर्व है बल्कि यह सामाजिक न्याय और मानवीय संवेदना का सबसे मजबूत संबल है जो गरीब और असहाय को भी देश के सबसे महंगे अस्पतालों में एक वीआईपी मरीज की तरह गरिमापूर्ण उपचार का अधिकार प्रदान करती है।
प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP): 90 प्रतिशत तक सस्ती जेनेरिक दवाएं
आयुष्मान भारत के अस्पताल उपचार के साथ-साथ दैनिक ओपीडी में डॉक्टरों द्वारा लिखी जाने वाली महंगी ब्रांडेड दवाओं के भारी खर्च से आम नागरिकों को बचाने के लिए भारत सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय द्वारा ‘प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना’ (PMBJP) का देशव्यापी संजाल स्थापित किया गया है। देश भर के सभी जिलों और कस्बों में 10,000 से अधिक ‘प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र’ सफलतापूर्वक संचालित किए जा रहे हैं।
इन केंद्रों पर उच्च गुणवत्ता वाली 2,000 से अधिक आवश्यक जेनेरिक दवाएं और 300 से अधिक सर्जिकल उपकरण उपलब्ध हैं जो बाजार की प्रसिद्ध ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50 से 90 प्रतिशत तक कम कीमत पर उपलब्ध कराए जाते हैं। उदाहरणार्थ मधुमेह, रक्तचाप, हृदय रोग, कैंसर और गैस्ट्रिक की जो दवाएं सामान्य बाजार में 100 रुपये की मिलती हैं, वे जनऔषधि केंद्रों पर मात्र 10 से 20 रुपये में उपलब्ध होती हैं। इन दवाओं की प्रभावकारिता और सुरक्षा की जांच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO-GMP) प्रमाणित प्रयोगशालाओं में की जाती है। इसके अतिरिक्त गरीब महिलाओं के मासिक धर्म स्वास्थ्य (Menstrual Hygiene) की रक्षा के लिए ‘जनऔषधि सुविधा सेनेटरी नैपकिन’ मात्र 1 रुपये प्रति पैड की दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है जिसने अब तक देश भर में 50 करोड़ से अधिक पैड्स वितरित कर ग्रामीण महिलाओं को गर्भाशय संक्रमण से मुक्ति दिलाई है।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम (PNDP): गुर्दे की विफलता में जीवनदान
क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) और गुर्दे की विफलता से पीड़ित मरीजों को जीवित रहने के लिए सप्ताह में कम से कम 2 से 3 बार हीमोडायलिसिस कराना पड़ता है। निजी अस्पतालों में एक बार के डायलिसिस का खर्च 2,000 से 3,000 रुपये तक होता है, जिससे मरीज के परिवार पर प्रति माह 25,000 से 30,000 रुपये का असहनीय वित्तीय बोझ पड़ता है। इस त्रासदी के समाधान हेतु राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम’ (PNDP) लागू किया गया है।
सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत देश के सभी जिला अस्पतालों में आधुनिक डायलिसिस केंद्र स्थापित किए गए हैं। आयुष्मान भारत के लाभार्थियों और बीपीएल परिवारों के लिए डायलिसिस सेवाएं 100 प्रतिशत पूर्णतः निःशुल्क प्रदान की जाती हैं। इसके अतिरिक्त सरकार ने ‘पेरिटोनियल डायलिसिस’ (घर पर डायलिसिस) की सुविधा का भी विस्तार किया है जिससे सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के वृद्ध और दुर्बल मरीजों को बार-बार जिला अस्पताल आने की परेशानी से मुक्ति मिली है। यह कार्यक्रम अब तक देश के लाखों डायलिसिस मरीजों को निःशुल्क सत्र उपलब्ध कराकर उनकी जीवन प्रत्याशा को बढ़ाने में अमूल्य संबल बन चुका है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुरक्षा: जेएसवाई एवं सुमन
भारत में मातृ मृत्यु दर (MMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) में ऐतिहासिक कमी लाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत कई परस्पर जुड़ी योजनाएं संचालित की जा रही हैं:
1. जननी सुरक्षा योजना (JSY): इसका मुख्य उद्देश्य गरीब गर्भवती महिलाओं में संस्थागत प्रसव (सरकारी या अधिकृत अस्पताल में डिलीवरी) को बढ़ावा देना है। अस्पताल में प्रसव कराने पर ग्रामीण महिलाओं को 1,400 रुपये और शहरी महिलाओं को 1,000 रुपये की सीधी नकद वित्तीय सहायता दी जाती है।
2. जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (JSSK): इसके तहत गर्भवती महिला और नवजात शिशु को प्रसव के दौरान संपूर्ण निःशुल्क सिजेरियन ऑपरेशन, मुफ्त दवाएं, मुफ्त रक्त संचरण, मुफ्त जांचें और घर से अस्पताल तक आने-जाने की 100 प्रतिशत निःशुल्क एंबुलेंस सुविधा (108/102 एंबुलेंस सेवा) प्रदान की जाती है।
3. सुरक्षित मातृत्व आश्वासन ‘सुमन’ (SUMAN) पहल: इसके तहत अस्पताल के गेट पर पहुंचने पर गर्भवती महिला को 100 प्रतिशत आदरणीय, गरिमापूर्ण और शून्य-व्यय मातृत्व सेवा की कानूनी गारंटी दी जाती है।
इन योजनाओं के संयुक्त प्रभाव से भारत में संस्थागत प्रसव की दर 2005 के मात्र 38 प्रतिशत से बढ़कर वर्तमान में 89 प्रतिशत से अधिक के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच चुकी है, जिसने लाखों माताओं और नवजात शिशुओं को असमय काल-कवलित होने से बचाया है।
ई-संजीवनी: राष्ट्रीय टेली-परामर्श सेवा द्वारा ग्रामीण स्वास्थ्य क्रांति
भारत के सुदूर गांवों और पर्वतीय क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों और सुपर स्पेशियलिटी विशेषज्ञों की अनुपलब्धता एक ऐतिहासिक चुनौती रही है। ग्रामीण मरीज को एक छोटे से परामर्श के लिए भी सैकड़ों किलोमीटर दूर बड़े शहर जाना पड़ता था। इस भौगोलिक और डिजिटल दूरी को समाप्त करने के लिए भारत सरकार ने ‘ई-संजीवनी’ (eSanjeevani) राष्ट्रीय टेली-मेडिसिन सेवा की शुरुआत की है जो आज विश्व का सबसे बड़ा टेली-परामर्श प्लेटफॉर्म बन चुका है।
ई-संजीवनी दो प्रारूपों में कार्य करती है:
1. ई-संजीवनी एबी-एचडब्ल्यूसी (डॉक्टर-से-डॉक्टर मॉडल): ग्रामीण आयुष्मान आरोग्य मंदिर में मौजूद सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) मरीज की जांच कर ऑनलाइन वीडियो कॉल के जरिए जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज के एमडी विशेषज्ञ डॉक्टर से जुड़ता है। डॉक्टर मरीज को स्क्रीन पर देखकर डिजिटल पर्चा (E-Prescription) जारी करता है और गांव में ही मरीज को निःशुल्क दवाएं मिल जाती हैं।
2. ई-संजीवनी ओपीडी (रोगी-से-डॉक्टर मॉडल): कोई भी नागरिक अपने साधारण स्मार्टफोन पर ई-संजीवनी ऐप डाउनलोड कर घर बैठे सीधे देश के शीर्ष सरकारी विशेषज्ञ डॉक्टरों से निःशुल्क वीडियो परामर्श ले सकता है।
अब तक 25 करोड़ से अधिक मरीज ई-संजीवनी के माध्यम से निःशुल्क टेली-परामर्श प्राप्त कर चुके हैं, जिसने ग्रामीण परिवारों के करोड़ों रुपये के यात्रा व्यय और समय की सीधी बचत की है।
पीएम आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM): महामारी-रोधी राष्ट्रीय स्वास्थ्य ढांचा
कोविड-19 महामारी के वैश्विक संकट ने यह स्पष्ट कर दिया था कि किसी भी देश की आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा उसकी सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना की मजबूती पर टिकी होती है। भविष्य की किसी भी महामारी या जैविक आपातकाल से 1.4 अरब नागरिकों की रक्षा करने के लिए भारत सरकार ने 64,180 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ ‘पीएम आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन’ (PM-ABHIM) की शुरुआत की है। यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल तंत्र को मजबूत करने की सबसे बड़ी अखिल भारतीय योजना है।
इस मिशन के तहत देश के सभी 730 से अधिक जिलों में आधुनिक ‘एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाएं’ (IPHL) स्थापित की जा रही हैं जो विषाणुओं, जीवाणुओं और संक्रामक रोगों की तत्काल जीनोम सीक्वेंसिंग और जांच करेंगी। 5 लाख से अधिक आबादी वाले सभी जिलों के सरकारी अस्पतालों में 50 से 100 बिस्तरों वाले समर्पित ‘क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक्स’ (CCHB) बनाए जा रहे हैं जिनमें अपने स्वयं के ऑक्सीजन प्लांट, आईसीयू वेंटिलेटर और आइसोलेशन वार्ड होंगे ताकि किसी नई महामारी के समय सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं बाधित न हों। इसके साथ ही देश के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों, बंदरगाहों और थल सीमाओं पर 50 नए ‘स्वास्थ्य प्रवेश बिंदु’ (Health Entry Points) और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) की 20 क्षेत्रीय शाखाएं स्थापित की जा रही हैं जो वैश्विक जैविक खतरों की रियल-टाइम डिजिटल निगरानी करती हैं।
निक्षय पोषण योजना और टीबी मुक्त भारत अभियान: 2025 तक तपेदिक उन्मूलन
तपेदिक (टीबी) सदियों से भारत में निर्धनता, कुपोषण और सामाजिक कलंक से जुड़ी एक भयंकर जानलेवा बीमारी रही है। संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDG) 2030 से 5 वर्ष पूर्व ही 2025 तक भारत से टीबी को पूरी तरह समाप्त करने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ का शंखनाद किया गया है।
इस अभियान का सबसे मानवीय और प्रभावी संबल ‘निक्षय पोषण योजना’ (Ni-kshay Poshan Yojana) है जिसके तहत देश के प्रत्येक अधिसूचित टीबी रोगी को उसके संपूर्ण उपचार काल (6 से 9 माह) तक पौष्टिक आहार खरीदने के लिए 500 रुपये प्रतिमाह की सीधी वित्तीय सहायता डीबीटी के माध्यम से उसके बैंक खाते में भेजी जाती है। इसके साथ ही समाज को इस लड़ाई से जोड़ने के लिए ‘निक्षय मित्र’ (Ni-kshay Mitra) पहल आरंभ की गई है जिसमें देश के राष्ट्रपति, मंत्रियों, सांसदों, कॉर्पोरेट घरानों और सामान्य नागरिकों ने 10 लाख से अधिक टीबी रोगियों को व्यक्तिगत रूप से गोद लिया है और उन्हें प्रति माह अतिरिक्त पौष्टिक खाद्य टोकरी (दालें, चना, मूंगफली, दूध पाउडर और खाद्य तेल) तथा भावनात्मक सहयोग प्रदान कर रहे हैं। देश के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आणविक डायग्नोस्टिक ‘ट्रू-नैट’ (TrueNat) और सीबी-नैट मशीनें लगाई गई हैं जो मात्र 2 घंटे में टीबी और दवा-प्रतिरोधी टीबी (MDR-TB) की सटीक पहचान कर तुरंत निःशुल्क दवाएं आरंभ कराती हैं।
राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन 2047: जनजातीय स्वास्थ्य क्रांति
सिकल सेल एनीमिया एक वंशानुगत आनुवंशिक रक्त विकार है जो मुख्य रूप से भारत के जनजातीय (आदिवासी) समाज को अत्यधिक प्रभावित करता है। इसमें लाल रक्त कणिकाओं (RBC) का सामान्य गोल आकार बदलकर हंसिया (सिकल) जैसा टेढ़ा और सख्त हो जाता है जिससे वे रक्त वाहिकाओं में फंस जाती हैं, भयानक जोड़ों का दर्द, गंभीर रक्ताल्पता और समय पूर्व मृत्यु का कारण बनती हैं। इस आनुवंशिक अभिशाप से आदिवासी भाई-बहनों को मुक्ति दिलाने के लिए 1 जुलाई 2023 को मध्य प्रदेश के शहडोल से ‘राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन’ का ऐतिहासिक शुभारंभ किया गया।
इस मिशन का लक्ष्य देश के 17 उच्च-प्रसार वाले राज्यों के 7 करोड़ से अधिक जनजातीय युवाओं (0 से 40 वर्ष की आयु) की सघन जांच करना है। जांच के उपरांत प्रत्येक व्यक्ति को एक रंगीन ‘सिकल सेल जेनेटिक स्टेटस कार्ड’ प्रदान किया जाता है। विवाह से पूर्व इन कार्डों का मिलान कराया जाता है ताकि दो सिकल सेल वाहक (Traits) आपस में विवाह न करें और आने वाली संतान इस गंभीर आनुवंशिक रोग से पूरी तरह सुरक्षित रहे। इसके अतिरिक्त मरीजों को आवश्यक हाइड्रोक्सीयूरिया दवाएं, फोलिक एसिड और निःशुल्क रक्त संचरण सेवाएं सीधे उनके ब्लॉक स्तर पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।
टेली-मानस (Tele-MANAS): 24×7 राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य परामर्श सेवा
आधुनिक जीवन की भागदौड़, अकेलापन, परीक्षाओं का तनाव, और अवसाद (डिप्रेशन) मानसिक स्वास्थ्य को एक गंभीर मूक संकट बना रहे थे, जिस पर समाज में खुलकर बात करने से बचा जाता था। इस हिचक को समाप्त करने और देश के प्रत्येक नागरिक को घर बैठे निःशुल्क, गोपनीय और पेशेवर मानसिक स्वास्थ्य परामर्श उपलब्ध कराने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ‘टेली-मानस’ (Tele Mental Health Assistance and Networking Across States – Tele-MANAS) हेल्पलाइन 14416 का शुभारंभ किया है।
यह 24 घंटे सातों दिन संचालित होने वाली पूर्णतः टोल-फ्री राष्ट्रीय हेल्पलाइन है जो 20 से अधिक भारतीय भाषाओं में सेवाएं प्रदान करती है। देश के 51 समर्पित टेली-मानस केंद्रों पर प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक, मनोचिकित्सक और सामाजिक कार्यकर्ता तैनात हैं जो तनाव, अनिद्रा, छात्रों में परीक्षा का भय, पारिवारिक विवाद, नशा मुक्ति और आत्महत्या के विचारों से जूझ रहे व्यक्तियों को तुरंत मनोवैज्ञानिक प्राथमिक उपचार (Psychological First Aid) और समाधान प्रदान करते हैं। अब तक 10 लाख से अधिक संकटग्रस्त नागरिकों ने टेली-मानस पर संपर्क कर मानसिक शांति और नया जीवन प्राप्त किया है।
आयुष (AYUSH) चिकित्सा पद्धतियों का मुख्यधारा में एकीकरण: समग्र आरोग्य मॉडल
भारत की प्राचीनतम चिकित्सा पद्धतियां—आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी (AYUSH)—रोगों के केवल लक्षणों को दबाने के स्थान पर शरीर, मन और आत्मा के समग्र स्वास्थ्य (Holistic Wellness) पर बल देती हैं। केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक नीतिगत बदलाव करते हुए आयुष को आधुनिक एलोपैथिक चिकित्सा की मुख्यधारा के साथ एकीकृत किया है। देश के सभी 22 नए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों (AIIMS) और प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में ‘एकीकृत चिकित्सा विभाग’ (Integrative Medicine Departments) स्थापित किए गए हैं जहां आधुनिक शल्य चिकित्सा और कैंसर कीमोथेरेपी के दुष्प्रभावों को कम करने हेतु आयुर्वेदिक औषधियों और चिकित्सीय योग का सफल समन्वय किया जा रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत की पारंपरिक चिकित्सा की वैज्ञानिक प्रामाणिकता को मान्यता देते हुए गुजरात के जामनगर में विश्व के पहले ‘डब्ल्यूएचओ पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक केंद्र’ (WHO Global Centre for Traditional Medicine – GCTM) की स्थापना की है। विदेशी नागरिकों को भारत में आकर आयुर्वेद और योग आधारित चिकित्सा कराने को सुगम बनाने हेतु भारत सरकार ने विशेष ‘आयुष वीजा’ (AYUSH Visa) श्रेणी आरंभ की है जिससे भारत वैश्विक ‘मेडिकल वैल्यू ट्रैवल’ (Medical Value Travel / हील इन इंडिया) का सबसे बड़ा वैश्विक केंद्र बन चुका है।
राष्ट्रीय एंटी-फ्रॉड यूनिट (NAFU) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सुरक्षा निगरानी
योजना के विशाल वित्तीय आकार और जनता के टैक्स के पैसे के शत-प्रतिशत सदुपयोग को सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने एक अत्यंत उच्च-तकनीकी ‘राष्ट्रीय एंटी-फ्रॉड यूनिट’ (National Anti-Fraud Unit – NAFU) की स्थापना की है। यह इकाई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) के अत्याधुनिक एल्गोरिदम के माध्यम से देश भर के 29,000 अस्पतालों के दैनिक क्लेम्स का 24×7 रियल-टाइम विश्लेषण करती है।
यदि कोई निजी अस्पताल फर्जी मरीजों के नाम पर क्लेम दर्ज करने (घोस्ट बिलिंग), अनावश्यक सर्जरी करने, या मरीजों से अवैध रूप से नकद पैसे वसूलने का प्रयास करता है, तो सिस्टम का ‘अनोमली डिटेक्शन इंजन’ उसे तुरंत लाल झंडी (रेड फ्लैग) दिखा देता है। मेडिकल ऑडिटर्स की स्वतंत्र टीमें गुप्त रूप से अस्पताल का औचक निरीक्षण करती हैं। गड़बड़ी पाए जाने पर अब तक सैकड़ों बेईमान अस्पतालों को स्थायी रूप से काली सूची (Blacklist) में डालकर उनका अनुबंध रद्द किया गया है, उन पर करोड़ों रुपये की रिकवरी की गई है और उनके विरुद्ध कठोर आपराधिक मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। यह सख्त विनियामक निगरानी यह सुनिश्चित करती है कि देश के सबसे गरीब और बीमार नागरिक का हक कोई बिचौलिया या बेईमान संस्थान न छीन सके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)
1. क्या आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए कोई आवेदन शुल्क या सालाना प्रीमियम देना पड़ता है?
कदापि नहीं। आयुष्मान भारत योजना 100 प्रतिशत सरकारी वित्तपोषित योजना है। पात्र लाभार्थी के लिए आयुष्मान कार्ड बनवाना, अस्पताल में भर्ती होना, दवाएं, सर्जरी और भोजन सब कुछ पूरी तरह निःशुल्क है। यदि कोई व्यक्ति या सीएससी संचालक कार्ड बनाने के नाम पर अवैध पैसे मांगता है, तो राष्ट्रीय टोल-फ्री नंबर 14555 पर शिकायत दर्ज की जा सकती है।
2. 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयुष्मान कार्ड कैसे बनेगा?
70 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्ग ‘आयुष्मान ऐप’ या ‘beneficiary.nha.gov.in’ पोर्टल पर जाकर अपने आधार कार्ड से ई-केवाईसी करके सीधे ‘आयुष्मान वय वंदना कार्ड’ के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए किसी आय प्रमाण पत्र या बीपीएल राशन कार्ड की आवश्यकता नहीं है; आधार कार्ड में दर्ज जन्मतिथि ही पात्रता का एकमात्र प्रमाण है।
3. यदि किसी परिवार में 5 से अधिक सदस्य हैं, तो क्या सभी को लाभ मिलेगा?
हां, आयुष्मान भारत योजना में परिवार के सदस्यों की संख्या (Family Size) अथवा उम्र की कोई सीमा नहीं है। परिवार के सभी सदस्य (दादा-दादी, माता-पिता, सभी बच्चे) एक ही 5 लाख के पारिवारिक फ्लोटर कवर के तहत उपचार प्राप्त करने के पूर्ण हकदार हैं।
4. क्या एक राज्य का आयुष्मान कार्ड दूसरे राज्य के अस्पताल में काम करता है?
हां, आयुष्मान भारत योजना ‘राष्ट्रीय स्तर पर पूर्णतः पोर्टेबल’ (Nationally Portable) है। उदाहरणार्थ यदि कोई मजदूर बिहार या उत्तर प्रदेश का रहने वाला है और वह काम के सिलसिले में मुंबई, दिल्ली, गुजरात या तमिलनाडु में रहता है, तो वह वहां के किसी भी संबद्ध सरकारी या निजी अस्पताल में अपने उसी कार्ड से 5 लाख तक का कैशलेस इलाज करा सकता है।
5. क्या मोतियाबिंद (Cataract) और घुटने का प्रत्यारोपण (Knee Replacement) इसमें कवर हैं?
हां, मोतियाबिंद की सर्जरी (लेंस प्रत्यारोपण सहित) और गंभीर गठिया से पीड़ित मरीजों के लिए टोटल नी रिप्लेसमेंट (कूल्हा व घुटना प्रत्यारोपण) दोनों ही प्रक्रियाएं आयुष्मान भारत योजना के उपचार पैकेजों में पूरी तरह शामिल हैं और संबद्ध अस्पतालों में निःशुल्क की जाती हैं।
6. अस्पताल में भर्ती होने पर यदि कोई डॉक्टर बाहर से दवा लाने को कहे तो क्या करें?
योजना के नियमों के अनुसार अस्पताल द्वारा बाहर से कोई भी दवा, सर्जिकल दस्ताने, इंजेक्शन या इम्प्लांट मंगवाना पूर्णतः गैर-कानूनी है। पैकेज के अंतर्गत संपूर्ण उपचार सामग्री अस्पताल को स्वयं उपलब्ध करानी होती है। ऐसा होने पर मरीज तुरंत अस्पताल के ‘आयुष्मान मित्र’ या जिला नोडल स्वास्थ्य अधिकारी से शिकायत कर सकता है।
7. क्या किसी बीमारी में केवल ओपीडी (OPD) परामर्श के लिए आयुष्मान भारत का लाभ मिलता है?
नहीं, 5 लाख का बीमा कवर केवल उन मामलों में लागू होता है जहां मरीज को कम से कम 24 घंटे के लिए अस्पताल में भर्ती (IPD – इन-पेशेंट) किया जाता है अथवा डे-केयर सर्जरी (जैसे डायलिसिस, कीमोथेरेपी, मोतियाबिंद) की आवश्यकता होती है। सामान्य ओपीडी और सर्दी-जुकाम की जांच के लिए मरीज नजदीकी ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ में निःशुल्क सेवाएं ले सकते हैं।
8. आयुष्मान भारत के अंतर्गत शिकायत दर्ज कराने का राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर क्या है?
योजना से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी, अस्पताल में इलाज से इनकार, भ्रष्टाचार या कार्ड बनवाने में आ रही समस्या के समाधान के लिए 24×7 राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर ‘14555’ पर किसी भी भाषा में कॉल करके सहायता प्राप्त की जा सकती है।
9. क्या निजी अस्पताल आयुष्मान भारत के मरीजों का इलाज करने से मना कर सकते हैं?
यदि कोई निजी अस्पताल राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के साथ विधिवत अनुबंधित (Empanelled) है, तो वह किसी भी आपातकालीन या पात्र आयुष्मान मरीज को भर्ती करने से इनकार नहीं कर सकता। मरीज को वापस लौटाने या अवैध वसूली करने पर अस्पताल का लाइसेंस और अनुबंध तुरंत निरस्त कर उस पर भारी कानूनी जुर्माना लगाया जाता है।
निष्कर्ष एवं स्वस्थ और समर्थ भारत का संकल्प
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना केवल एक स्वास्थ्य नीति नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में सामाजिक न्याय और मानवीय संवेदनशीलता का सबसे बड़ा मील का पत्थर है। इसने देश के सबसे निर्धन, असहाय और उपेक्षित नागरिक के मन से बीमारी के समय लगने वाले उस भयानक डर को समाप्त कर दिया है कि पैसे के अभाव में उसका या उसके परिजनों का जीवन संकट में पड़ जाएगा। 5 लाख रुपये का यह स्वास्थ्य सुरक्षा कवच देश के करोड़ों परिवारों के लिए एक ऐसा रक्षा-कवच बन चुका है जिसने उन्हें चिकित्सा ऋण की गुलामी से मुक्त कर एक स्वस्थ, गरिमापूर्ण और आत्मविश्वास से भरा जीवन प्रदान किया है। 1.6 लाख आरोग्य मंदिरों से प्राथमिक रोकथाम, 29,000 अस्पतालों में द्वितीयक व तृतीयक कैशलेस उपचार और डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के समन्वय से भारत एक ऐसे ‘स्वस्थ भारत, समर्थ भारत’ के निर्माण की दिशा में अग्रसर है जहां स्वास्थ्य सेवा किसी का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का जन्मसिद्ध अधिकार है।

