किसी भी प्रगतिशील राष्ट्र की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संवृद्धि का वास्तविक पैमाना उस समाज में महिलाओं की स्थिति, सुरक्षा और स्वावलंबन से तय होता है। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि ‘जिस प्रकार एक पक्षी केवल एक पंख के सहारे उड़ान नहीं भर सकता, ठीक उसी प्रकार कोई भी राष्ट्र अपनी आधी आबादी के सशक्तिकरण के बिना प्रगति के शिखर पर नहीं पहुंच सकता।’ स्वतंत्र भारत के इतिहास में महिलाओं को विकास की निष्क्रिय लाभार्थी (Passive Beneficiaries) मानने की पुरानी औपनिवेशिक मानसिकता को त्यागकर अब उन्हें विकास के पथप्रदर्शक और निर्णयकर्ता (Active Drivers of Development) के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। केंद्र सरकार द्वारा संचालित ‘नारी शक्ति’ आधारित नीतियां जन्म से लेकर वृद्धावस्था तक एक महिला के जीवन के प्रत्येक चरण को सुरक्षा, सम्मान और अवसर प्रदान करती हैं। गर्भस्थ शिशु की पोषण सुरक्षा से लेकर बेटी के जन्म का उत्सव, उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय संबल, धुआं-मुक्त स्वच्छ रसोई, स्वरोजगार के लिए संस्थागत ऋण और संकट की घड़ी में कानूनी सहायता तक योजनाओं का एक सुदृढ़ सुरक्षा चक्र निर्मित किया गया है। यह आलेख भारत सरकार द्वारा संचालित प्रमुख महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का समग्र, तथ्यपरक और विश्लेषणात्मक विवरण प्रस्तुत करता है।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY): धुआं-मुक्त रसोई और नारी स्वास्थ्य की रक्षा
पारंपरिक भारतीय ग्रामीण परिवारों में सदियों से भोजन पकाने के लिए लकड़ी, उपले, सूखे पत्ते और कोयले जैसे ठोस बायोमास ईंधनों का उपयोग किया जाता रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की वैज्ञानिक रिपोर्टों के अनुसार अस्वच्छ ईंधन से जलने वाले पारंपरिक चूल्हे से निकलने वाला जहरीला धुआं प्रतिदिन 400 सिगरेट पीने के बराबर फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता था। इसके कारण ग्रामीण गृहणियां और उनके नन्हे बच्चे क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), दमा, फेफड़ों का कैंसर, मोतियाबिंद और गंभीर श्वसन विकारों से पीड़ित होते थे। इसके अतिरिक्त लकड़ी एकत्र करने के लिए ग्रामीण महिलाओं को कई किलोमीटर पैदल चलकर जंगलों में जाना पड़ता था, जिससे उनका भारी समय और शारीरिक ऊर्जा नष्ट होती थी।
इस मूक मानवीय त्रासदी को समाप्त करने के लिए 1 मई 2016 को उत्तर प्रदेश के बलिया से ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ (PMUY) का ऐतिहासिक शुभारंभ किया गया। इसका प्रमुख नारा था ‘स्वच्छ ईंधन, बेहतर जीवन’। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा संचालित इस योजना ने देश के 10 करोड़ से अधिक निर्धन परिवारों की महिलाओं को निःशुल्क एलपीजी (LPG) गैस कनेक्शन प्रदान कर ग्रामीण जीवन की तस्वीर बदल दी है।
उज्ज्वला योजना के प्रमुख लाभ एवं वित्तीय सहायता
उज्ज्वला योजना के तहत लाभार्थी महिला को निम्नलिखित सुविधाएं पूरी तरह निःशुल्क प्रदान की जाती हैं:
1. सिक्योरिटी डिपॉजिट मुक्ति: गैस सिलेंडर के सिक्योरिटी डिपॉजिट और प्रेशर रेगुलेटर का पूरा खर्च (1600 रुपये प्रति कनेक्शन) केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाता है।
2. निःशुल्क प्रथम रिफिल और गैस चूल्हा: उज्ज्वला 2.0 के तहत लाभार्थी को पहला भरा हुआ गैस सिलेंडर और आईएसआई प्रमाणित डबल-बर्नर गैस चूल्हा (Hotplate) बिना किसी शुल्क के दिया जाता है।
3. डीबीटी प्रत्यक्ष सब्सिडी: प्रत्येक रिफिल पर सरकार द्वारा 300 रुपये की सीधी प्रत्यक्ष सब्सिडी लाभार्थी महिला के आधार-लिंक बैंक खाते में अंतरित की जाती है, जिससे वर्ष भर में 12 सिलेंडर तक रियायती दर पर उपलब्ध होते हैं।
4. महिला के नाम पर कनेक्शन: परिवार के पुरुष के स्थान पर एलपीजी कनेक्शन अनिवार्य रूप से घर की वयस्क महिला मुखिया के नाम पर ही जारी किया जाता है, जिससे परिवार में उसके कानूनी अधिकार और सम्मान में वृद्धि हुई है।
सुकन्या समृद्धि योजना (SSY): बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की वित्तीय गारंटी
‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ राष्ट्रीय अभियान के वित्तीय घटक के रूप में वर्ष 2015 में ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ (Sukanya Samriddhi Yojana – SSY) का शुभारंभ किया गया। भारतीय समाज में बालिकाओं के जन्म को आर्थिक बोझ मानने की संकीर्ण सामाजिक कुरीति को समाप्त करना और उनकी उच्च शिक्षा व विवाह के लिए वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना इस योजना का मुख्य उद्देश्य है।
डाक विभाग और सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा संचालित यह लघु बचत योजना देश के मध्यम और निम्न आय वर्गीय परिवारों के लिए सबसे लोकप्रिय और सर्वाधिक रिटर्न देने वाला निवेश माध्यम बन चुकी है।
सुकन्या समृद्धि योजना की प्रमुख विशेषताएं और नियम
1. खाता खोलने की पात्रता: माता-पिता या कानूनी अभिभावक अपनी बेटी के जन्म से लेकर 10 वर्ष की आयु पूरी होने तक किसी भी डाकघर या अधिकृत वाणिज्यिक बैंक में यह खाता खोल सकते हैं। एक परिवार में अधिकतम दो बेटियों के लिए यह खाता खोला जा सकता है (जुड़वां या तीन बेटियां होने की स्थिति में तीसरे खाते की भी अनुमति है)।
2. न्यूनतम और अधिकतम निवेश सीमा: खाता मात्र 250 रुपये की न्यूनतम प्रारंभिक राशि से खोला जा सकता है। एक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम 250 रुपये और अधिकतम 1.50 लाख रुपये जमा किए जा सकते हैं।
3. आकर्षक ब्याज दर: सरकार द्वारा सुकन्या समृद्धि खाते पर सभी लघु बचत योजनाओं में सबसे अधिक ब्याज दर (वर्तमान में 8.2 प्रतिशत प्रतिवर्ष, जो तिमाही आधार पर चक्रवृद्धि की जाती है) प्रदान की जाती है।
4. परिपक्वता अवधि: खाता खोलने की तिथि से 21 वर्ष बाद या बेटी की आयु 18 वर्ष पूरी होने के पश्चात उसके विवाह के समय यह खाता पूरी तरह परिपक्व होता है। इसमें 15 वर्ष तक नियमित जमा करना होता है, जबकि शेष 6 वर्ष तक बिना कोई राशि जमा किए चक्रवृद्धि ब्याज जुड़ता रहता है।
5. आंशिक निकासी की सुविधा: बेटी की आयु 18 वर्ष पूरी होने पर या 10वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उसकी उच्च शिक्षा (कॉलेज, विश्वविद्यालय या व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की फीस) के लिए पिछले वित्तीय वर्ष के अंत में उपलब्ध कुल जमा राशि का 50 प्रतिशत तक निकाला जा सकता है।
6. ट्रिपल ई (EEE) कर छूट: सुकन्या समृद्धि योजना आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत पूर्ण कर मुक्त श्रेणी में आती है। इसमें जमा की गई राशि पर कर छूट मिलती है, अर्जित ब्याज पर कोई कर नहीं लगता और परिपक्वता पर मिलने वाली पूरी धनराशि 100 प्रतिशत कर-मुक्त (Tax-Free) होती है।
चित्र: भारत में महिलाओं की वित्तीय सुरक्षा, उच्च शिक्षा, मातृ पोषण और सामाजिक सशक्तिकरण की प्रमुख राष्ट्रीय योजनाएं
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY): गर्भवती महिलाओं को पोषण एवं मातृत्व सहायता
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA 2013) के अनिवार्य प्रावधानों के तहत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ (PMMVY) का संचालन किया जा रहा है। भारत में असंगठित क्षेत्र में कार्य करने वाली करोड़ों दिहाड़ी मजदूर महिलाएं अपनी गर्भावस्था के अंतिम दिनों तक कठिन शारीरिक श्रम करने को विवश होती थीं और प्रसव के तुरंत बाद मजदूरी के नुकसान के डर से पुनः काम पर लौट आती थीं। इसके कारण उन्हें और नवजात शिशु को पर्याप्त पोषण व आराम नहीं मिल पाता था, जिसके परिणामस्वरूप मातृ मृत्यु दर (MMR), शिशु मृत्यु दर (IMR), बच्चों में ठिगनापन (Stunting) और कम वजन (Wasting) की गंभीर समस्याएं बनी रहती थीं।
मातृ वंदना योजना गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान मजदूरी के नुकसान की आंशिक भरपाई के लिए प्रत्यक्ष नकद प्रोत्साहन (Conditional Cash Transfer) प्रदान करती है ताकि वे उचित पोषण प्राप्त कर सकें और सुरक्षित प्रसव करा सकें।
मातृ वंदना योजना की वित्तीय सहायता संरचना
संशोधित ‘मिशन शक्ति’ के तहत मातृ वंदना योजना के वित्तीय लाभों को और अधिक विस्तार दिया गया है:
1. प्रथम संतान के जन्म पर: गर्भवती महिला को 5,000 रुपये की वित्तीय सहायता दो किस्तों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सीधे उसके बैंक खाते में दी जाती है:
– प्रथम किस्त (3,000 रुपये): गर्भावस्था के शुरुआती पंजीकरण (ANC) और कम से कम एक प्रसव पूर्व जांच पूरी होने पर।
– द्वितीय किस्त (2,000 रुपये): बच्चे के जन्म पंजीकरण और प्राथमिक टीकों (BCG, OPV, DPT, हेपेटाइटिस बी) का पहला चक्र पूरा होने पर।
2. द्वितीय संतान यदि बालिका (बेटी) हो: घटते बाल लिंगानुपात को सुधारने और कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए सरकार ने विशेष प्रावधान किया है कि यदि दूसरी संतान बालिका के रूप में जन्म लेती है, तो प्रसव के बाद एकमुश्त 6,000 रुपये की विशेष प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।
3. संस्थागत प्रसव के साथ अभिसरण: जननी सुरक्षा योजना (JSY) के तहत मिलने वाले 1,400 रुपये को मिलाकर एक निर्धन प्रसूता महिला को मातृत्व लाभ के रूप में कुल लगभग 6,400 से 7,400 रुपये तक की सरकारी सहायता प्राप्त होती है।
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (BBBP): सामाजिक दृष्टिकोण में क्रांतिकारी परिवर्तन
वर्ष 2011 की जनगणना में भारत का बाल लिंगानुपात (0-6 वर्ष) गिरकर प्रति 1,000 बालकों पर मात्र 918 बालिकाओं तक पहुंच गया था, जो देश के सामाजिक ताने-बाने के लिए एक गंभीर खतरे की घंटी थी। हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के कई जिलों में यह आंकड़ा 850 से भी नीचे चला गया था। इस विषम लैंगिक असंतुलन को दूर करने के लिए 22 जनवरी 2015 को हरियाणा के पानीपत से ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ (BBBP) राष्ट्रीय अभियान शुरू किया गया।
यह महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय का एक संयुक्त त्रिपक्षीय राष्ट्रीय मिशन है। इसने तीन प्रमुख मोर्चों पर ऐतिहासिक सफलता प्राप्त की है:
1. कन्या भ्रूण हत्या पर कड़ा कानूनी शिकंजा: प्री-कॉन्सेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स (PCPNDT) एक्ट को कड़ाई से लागू कर अवैध लिंग जांच करने वाले अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर राष्ट्रव्यापी छापे मारे गए और दोषियों को कठोर कारावास की सजा दिलाई गई।
2. बालिकाओं की शिक्षा और स्कूल नामांकन: कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) के विस्तार, प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में बालिकाओं के लिए अलग स्वच्छ शौचालयों के निर्माण और निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों व साइकिल वितरण से स्कूलों में बालिकाओं का सकल नामांकन अनुपात (GER) बालकों के बराबर या उनसे अधिक हो गया है।
3. जन्म के समय लिंगानुपात (SRB) में ऐतिहासिक सुधार: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के ताजा आंकड़ों के अनुसार देश का समग्र लिंगानुपात बढ़कर प्रति 1,000 पुरुषों पर 1,020 महिलाओं तक पहुंच गया है, जो स्वतंत्र भारत में पहली बार महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक होने का ऐतिहासिक मील का पत्थर है।
दीनदयाल अंत्योदय योजना (DAY-NRLM) और ‘लखपति दीदी’ आंदोलन
ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा संचालित ‘दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन’ (DAY-NRLM) विश्व का सबसे बड़ा महिला स्वयं सहायता समूह (Self Help Group – SHG) नेटवर्क है। देश भर के गांवों में 90 लाख से अधिक महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 10 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाओं को संगठित किया गया है।
इस नेटवर्क को आर्थिक महाशक्ति में बदलने के लिए केंद्र सरकार ने ‘लखपति दीदी’ (Lakhpati Didi) राष्ट्रीय महा-अभियान आरंभ किया है। इसका उद्देश्य प्रत्येक स्वयं सहायता समूह की सदस्य महिला को स्थायी आजीविका और उद्यम से जोड़कर उसकी वार्षिक घरेलू आय को कम से कम 1 लाख रुपये से अधिक पहुंचाना है। अब तक 1 करोड़ से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं और आगामी वर्षों में 3 करोड़ लखपति दीदी बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित है।
लखपति दीदियों को निम्नलिखित आधुनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षित और वित्तपोषित किया जा रहा है:
1. नमो ड्रोन दीदी (Namo Drone Didi): ग्रामीण महिलाओं को आधुनिक कृषि ड्रोन उड़ाने, फसलों पर नैनो यूरिया और कीटनाशकों का सटीक छिड़काव करने का पायलट प्रशिक्षण और निःशुल्क ड्रोन दिए जा रहे हैं, जिससे वे प्रति एकड़ छिड़काव का व्यावसायिक किराया अर्जित कर रही हैं।
2. बैंक सखी और डिजिटल दीदी: गांवों में बैंक शाखाओं के अभाव को दूर करने के लिए महिलाएं माइक्रो-एटीएम और बायोमेट्रिक मशीनों से घर-घर जाकर पेंशन, छात्रवृत्ति और डीबीटी नकदी निकासी की सेवाएं दे रही हैं।
3. कृषि सखी और पशु सखी: जैविक खेती, वर्मीकम्पोस्ट निर्माण, दुग्ध उत्पादन और पशु स्वास्थ्य प्रबंधन में तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में सेवाएं प्रदान करना।
4. सौर सखी: ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर रूफटॉप और एलईडी लाइट निर्माण व असेंबलिंग का कार्य करना।
मुद्रा योजना एवं स्टैंड-अप इंडिया: महिला उद्यमिता को पंख
महिलाओं को केवल छोटे-मोटे हस्तशिल्प तक सीमित रखने के स्थान पर उन्हें बड़े व्यवसायों का मालिक बनाने के लिए वित्तीय समावेशन की विशेष योजनाएं चलाई गई हैं:
1. प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY): बिना किसी गिरवी (Collateral-Free) के दिए जाने वाले मुद्रा ऋणों (शिशु, किशोर और तरुण श्रेणी) के कुल लाभार्थियों में से लगभग 69 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं। करोड़ों महिलाओं ने ब्यूटी पार्लर, बुटीक, कैटरिंग, रिटेल किराना और विनिर्माण इकाइयां स्थापित कर लाखों अन्य लोगों को रोजगार दिया है।
2. स्टैंड-अप इंडिया योजना: प्रत्येक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक की प्रत्येक शाखा के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वह ग्रीनफील्ड उद्यम शुरू करने के लिए कम से कम एक महिला उद्यमी को 10 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक का बैंक ऋण अनिवार्य रूप से स्वीकृत करे।
वन स्टॉप सेंटर (सखी केंद्र) और महिला हेल्पलाइन (181)
घरेलू हिंसा, कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न, दहेज प्रताड़ना, एसिड अटैक या किसी भी प्रकार के संकट से पीड़ित महिलाओं को त्वरित न्याय और सहायता प्रदान करने के लिए देश के प्रत्येक जिले में ‘वन स्टॉप सेंटर’ (One Stop Centre – OSC) अथवा ‘सखी केंद्र’ स्थापित किए गए हैं।
सखी केंद्र की प्रमुख विशेषताएं:
1. एकीकृत एकल खिड़की सहायता: एक ही छत के नीचे पीड़ित महिला को आपातकालीन चिकित्सा सहायता, पुलिस प्राथमिकी दर्ज कराने की सुविधा, निःशुल्क विधिक सहायता (Legal Aid), मनोवैज्ञानिक परामर्श (Counseling) और 5 दिनों तक सुरक्षित अस्थायी आश्रय (Temporary Shelter) प्रदान किया जाता है।
2. 24×7 महिला हेल्पलाइन (181): पूरे देश में 181 एक सार्वभौमिक टोल-फ्री आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर है जो 24 घंटे किसी भी संकटग्रस्त महिला को तुरंत पुलिस पीसीआर, एम्बुलेंस या नजदीकी सखी केंद्र से जोड़ता है।
सुरक्षित मातृत्व आश्वासन ‘सुमन’ (SUMAN) और जननी सुरक्षा योजना
मातृ और शिशु मृत्यु दर को शून्य तक लाने के राष्ट्रीय संकल्प के साथ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा ‘सुमन’ (सुरक्षित मातृत्व आश्वासन) योजना संचालित की जा रही है। इसके तहत किसी भी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जाने वाली प्रत्येक गर्भवती महिला और प्रसव के 6 माह बाद तक मां और बीमार नवजात शिशु को 100 प्रतिशत निःशुल्क और गरिमापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देने की कानूनी गारंटी दी गई है।
योजना के प्रमुख अधिकार:
1. शून्य खर्च प्रसव: सामान्य प्रसव से लेकर जटिल सिजेरियन ऑपरेशन (C-Section) तक अस्पताल में एक भी रुपया खर्च नहीं होता। दवाइयां, रक्त चढ़ाना, एनेस्थीसिया और जांचें पूरी तरह मुफ्त होती हैं।
2. घर से अस्पताल तक निःशुल्क परिवहन: आपातकालीन 102 और 108 एम्बुलेंस सेवा द्वारा गर्भवती महिला को घर से अस्पताल लाने और प्रसव के बाद सुरक्षित घर छोड़ने की निःशुल्क सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
आधिकारिक संदर्भ एवं अधिकृत जानकारी के स्रोत
महिला कल्याण योजनाओं के आधिकारिक दिशा-निर्देशों, ऑनलाइन आवेदन, पात्रता नियमों और हेल्पलाइन की अधिकृत जानकारी हेतु नागरिक निम्नलिखित आधिकारिक सरकारी पोर्टलों का संदर्भ ले सकते हैं:
1. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय आधिकारिक पोर्टल (MWCD)
2. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना अधिकृत पोर्टल (PMUY Portal)
3. भारतीय डाक विभाग (India Post – सुकन्या समृद्धि योजना दिशानिर्देश)
4. राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM लखपति दीदी पोर्टल)
5. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य शोध रिपोर्ट
6. यूनिसेफ (UNICEF) बालिका शिक्षा एवं लैंगिक समानता रिपोर्ट
प्रमुख महिला कल्याण एवं सुरक्षा योजनाओं का तुलनात्मक विश्लेषण
भारत सरकार द्वारा संचालित विभिन्न महिला योजनाओं के उद्देश्य, पात्रता, वित्तीय लाभ और लक्षित वर्ग में अंतर को समझना आवश्यक है ताकि समाज का प्रत्येक वर्ग अपनी आवश्यकतानुसार सही योजना का पूर्ण लाभ उठा सके। जहां सुकन्या समृद्धि योजना बालिका के भविष्य की दीर्घकालिक बचत का साधन है, वहीं उज्ज्वला योजना घरेलू स्वास्थ्य और मातृ वंदना योजना मातृत्व पोषण सुरक्षा से संबंधित है।
नीचे दी गई विस्तृत तुलनात्मक तालिका देश की प्रमुख महिला कल्याण योजनाओं के मुख्य घटकों, सहायता राशि और प्रशासनिक तंत्र का स्पष्ट तुलनात्मक विवरण प्रस्तुत करती है:
| योजना का नाम | लक्षित लाभार्थी वर्ग | मुख्य वित्तीय लाभ / सहायता | प्रमुख उद्देश्य एवं प्रभाव |
|---|---|---|---|
| प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) | निर्धन व बीपीएल परिवार की वयस्क महिला मुखिया | निःशुल्क गैस कनेक्शन, पहला सिलेंडर व चूल्हा + ₹300 डीबीटी सब्सिडी | धुआं-मुक्त स्वच्छ रसोई, फेफड़ों की बीमारियों से मुक्ति व समय की बचत |
| सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) | 0 से 10 वर्ष तक की बालिकाएं (अधिकतम 2 बेटियां) | 8.2% वार्षिक चक्रवृद्धि ब्याज, धारा 80C EEE पूर्ण कर छूट | बालिका की उच्च शिक्षा व विवाह हेतु सुदृढ़ दीर्घकालिक कोष निर्माण |
| प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) | गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली माताएं | प्रथम शिशु पर ₹5,000 और दूसरी कन्या होने पर ₹6,000 डीबीटी नकद | मजदूरी नुकसान की भरपाई, बेहतर मातृ-शिशु पोषण व संस्थागत प्रसव |
| लखपति दीदी (DAY-NRLM) | ग्रामीण महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की सदस्य | कौशल प्रशिक्षण, रियायती बैंक लिंकेज व ड्रोन/माइक्रो-एटीएम उपकरण | वार्षिक घरेलू आय ₹1 लाख से अधिक कर महिलाओं को आत्मनिर्भर उद्यमी बनाना |
| वन स्टॉप सेंटर (सखी केंद्र) | हिंसा, उत्पीड़न या विपत्ति से पीड़ित कोई भी महिला | निःशुल्क चिकित्सा, पुलिस सहायता, कानूनी परामर्श व 5 दिन सुरक्षित आश्रय | संकटग्रस्त महिलाओं को एक ही छत के नीचे तुरंत 24×7 समग्र संरक्षण |
यह तुलनात्मक विवरण दर्शाता है कि सरकार की नीतियां महिलाओं को केवल राहत देने वाली योजनाएं नहीं हैं, बल्कि उनके जीवन को सुरक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता से परिपूर्ण करने का एक संपूर्ण राष्ट्रीय रोडमैप हैं।
मिशन शक्ति: ‘संबल’ और ‘समर्थ’ उप-योजनाओं का एकीकृत सुरक्षा चक्र
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 15वें वित्त आयोग की अवधि (2021-22 से 2025-26) के दौरान महिलाओं के संरक्षण, सुरक्षा और समग्र सशक्तिकरण के लिए संचालित सभी पूर्ववर्ती योजनाओं को एक विशाल एकीकृत छतरी ‘मिशन शक्ति’ (Mission Shakti) के अंतर्गत पुनर्गठित किया है। मिशन शक्ति को दो व्यापक उप-योजनाओं में विभाजित किया गया है: ‘संबल’ (Sambal – सुरक्षा एवं संरक्षण) और ‘समर्थ’ (Samarthya – सशक्तिकरण)।
1. संबल उप-योजना: संकटग्रस्त महिलाओं का सुरक्षा कवच
‘संबल’ उप-योजना का मुख्य ध्येय महिलाओं के खिलाफ होने वाले किसी भी प्रकार के अपराध, हिंसा और उत्पीड़न को रोकना और त्वरित न्याय प्रदान करना है:
1. वन स्टॉप सेंटर (OSC): देश भर के 730 से अधिक जिलों में सखी केंद्र हिंसा पीड़ित महिलाओं को आपातकालीन सेवाएं दे रहे हैं।
2. महिला हेल्पलाइन (181): चौबीसों घंटे काम करने वाली एकीकृत आपातकालीन कॉल सेवा।
3. ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ (BBBP): समाज में बालिकाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और उनके अधिकारों की रक्षा का जन-अभियान।
4. नारी अदालत (Nari Adalat): ग्राम पंचायत स्तर पर महिलाओं द्वारा संचालित वैकल्पिक विवाद समाधान (Alternative Dispute Resolution – ADR) मंच, जहां पारिवारिक विवादों, संपत्ति अधिकारों और घरेलू समस्याओं का सौहार्दपूर्ण समाधान सामाजिक स्तर पर ही किया जाता है।
2. समर्थ उप-योजना: महिलाओं की आत्मनिर्भरता और विकास
‘समर्थ’ उप-योजना महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन और पोषण सुरक्षा को समर्पित है:
1. प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY): गर्भवती महिलाओं को पोषण सुरक्षा और मातृत्व वित्तीय लाभ।
2. शक्ति सदन (Swadhar Greh & Short Stay Homes): बेसहारा, परित्यक्त, विधवा और तस्करी से बचाई गई महिलाओं के लिए गरिमापूर्ण पुनर्वास, कौशल प्रशिक्षण और दीर्घकालिक आश्रय।
3. सखी निवास (Working Women Hostels): शहरों में रोजगार हेतु आने वाली ग्रामीण और निम्न-मध्यम वर्गीय युवतियों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और किफायती आवासीय छात्रावास।
4. राष्ट्रीय शिशुगृह योजना (Palna – National Creche Scheme): कामकाजी माताओं के 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों की दिन में सुरक्षित देखभाल, पोषण और प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा की व्यवस्था ताकि महिलाएं निश्चिंत होकर कार्यस्थलों पर अपनी उत्पादकता बढ़ा सकें।
डिजिटल वित्तीय समावेशन और प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) का नारी प्रभाव
दशकों तक भारतीय बैंकिंग व्यवस्था में महिलाओं की उपस्थिति अत्यंत नगण्य थी। बैंक खाता न होने के कारण न तो महिलाएं अपनी निजी बचत को सुरक्षित रख पाती थीं और न ही सरकार द्वारा भेजी जाने वाली कल्याणकारी योजनाओं का पैसा सीधे उनके हाथों तक पहुंचता था। बिचौलिए और परिवार के पुरुष उस पैसे का दुरुपयोग कर लेते थे। 28 अगस्त 2014 को शुरू की गई ‘प्रधानमंत्री जन धन योजना’ (PMJDY) ने भारतीय महिलाओं को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था का केंद्र बिंदु बना दिया।
जन धन योजना की क्रांतिकारी उपलब्धियां:
1. 55 प्रतिशत से अधिक महिला खाते: देश भर में खोले गए 53 करोड़ से अधिक जन धन खातों में से लगभग 30 करोड़ खाते महिलाओं के नाम पर हैं।
2. प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) का सीधा स्वामित्व: उज्ज्वला सब्सिडी, मातृ वंदना सहायता, लाडली बहना या महतारी वंदन जैसी राज्य स्तरीय योजनाएं, मनरेगा मजदूरी और पेंशन सीधे महिला के खाते में जमा होती है। इससे भ्रष्टाचार और बिचौलियों का पूरी तरह खात्मा हो गया है।
3. रुपे डेबिट कार्ड और बीमा सुरक्षा: प्रत्येक महिला खाताधारक को निःशुल्क रुपे कार्ड और 2 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा कवर दिया गया है।
4. ₹10,000 की ओवरड्राफ्ट सुविधा: परिवार की किसी आकस्मिक जरूरत के समय महिला मुखिया को बैंक खाते से बिना किसी पूछताछ के तुरंत 10,000 रुपये तक की ओवरड्राफ्ट ऋण सुविधा मिलती है, जिसने उन्हें स्थानीय सूदखोरों के चंगुल से हमेशा के लिए मुक्त कर दिया है।
पंचायती राज और स्थानीय निकायों में महिलाओं का राजनीतिक नेतृत्व
आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण तब तक अधूरा रहता है जब तक महिलाओं को राजनीतिक सत्ता और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में समान भागीदारी न मिले। 73वें और 74वें संविधान संशोधन अधिनियमों ने ग्रामीण पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए कम से कम एक-तिहाई (33 प्रतिशत) सीटें अनिवार्य रूप से आरक्षित की थीं।
वर्तमान समय में भारत के 20 से अधिक राज्यों (जैसे बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, केरल, ओडिशा, महाराष्ट्र) ने इस आरक्षण को बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है। आज देश भर की 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों में 14 लाख से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधि (Elected Women Representatives – EWRs) सरपंच, उप-सरपंच और वार्ड पंच के रूप में सक्रिय रूप से शासन चला रही हैं।
इन महिला जनप्रतिनिधियों ने प्राथमिकताओं को पूरी तरह बदल दिया है:
1. पेयजल, स्वच्छता और शौचालयों के निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता देना।
2. प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) की गुणवत्ता पर कड़ी निगरानी रखना।
3. शराब और नशीले पदार्थों के खिलाफ कड़े सामाजिक नियम लागू करना।
4. नारी शक्ति वंदन अधिनियम (106वां संविधान संशोधन): संसद (लोकसभा) और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने वाले इस ऐतिहासिक कानून ने भारत के सर्वोच्च विधायी सदनों में भी नारी शक्ति के नेतृत्वकारी युग का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।
सुरक्षा कानून, कार्यस्थल पर लैंगिक समानता और मातृत्व लाभ संशोधन
कल्याणकारी वित्तीय योजनाओं के साथ-साथ भारत सरकार ने महिलाओं को कानूनी और कार्यस्थलों पर सुरक्षित वातावरण देने के लिए कई युगांतकारी विधिक सुधार किए हैं:
1. मातृत्व लाभ संशोधन अधिनियम 2017: संगठित क्षेत्र की कामकाजी महिलाओं के लिए सवेतन मातृत्व अवकाश (Paid Maternity Leave) को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह (6 माह) कर दिया गया, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कनाडा और नॉर्वे जैसे विकसित देशों के समकक्ष है। इसके अतिरिक्त 50 से अधिक कर्मचारियों वाले प्रत्येक संस्थान में अनिवार्य शिशुगृह (Creche) की सुविधा का कानून बनाया गया।
2. कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न निवारण अधिनियम 2013 (POSH Act): प्रत्येक सरकारी और निजी संस्थान में ‘आंतरिक शिकायत समिति’ (Internal Complaints Committee – ICC) की स्थापना अनिवार्य की गई है, जो महिलाओं के खिलाफ किसी भी उत्पीड़न की त्वरित और गोपनीय जांच करती है।
3. मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम 2019: सदियों पुरानी अमानवीय ‘तीन तलाक’ (तलाक-ए-बिद्दत) की कुरीति को गैर-कानूनी और दंडनीय अपराध घोषित कर मुस्लिम महिलाओं को वैवाहिक सुरक्षा, गुजारा भत्ता और आत्मसम्मान का कानूनी अधिकार प्रदान किया गया।
विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उच्च शोध में नारी शक्ति: ‘विज्ञान ज्योति’ और ‘किरण’ योजनाएं
आधुनिक ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) विषयों में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना देश के भविष्य के लिए अनिवार्य है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा इस दिशा में क्रांतिकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं:
1. विज्ञान ज्योति (Vigyan Jyoti) कार्यक्रम: मेधावी ग्रामीण और छोटे शहरों की छात्राओं को 9वीं से 12वीं कक्षा के दौरान आईआईटी, एनआईटी और राष्ट्रीय शोध प्रयोगशालाओं का भ्रमण कराकर उन्हें इंजीनियरिंग और वैज्ञानिक अनुसंधानों में करियर बनाने हेतु प्रोत्साहित और प्रशिक्षित किया जाता है।
2. ‘किरण’ योजना (KIRAN – Knowledge Involvement in Research Advancement through空Nurturing): उन उच्च शिक्षित महिला वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को पुनः वैज्ञानिक मुख्यधारा में लाने के लिए फेलोशिप प्रदान की जाती है, जिनका करियर पारिवारिक जिम्मेदारियों, विवाह या मातृत्व के कारण बीच में छूट गया था। इसके तहत महिलाओं को स्वतंत्र शोध परियोजनाएं चलाने के लिए 3 से 5 वर्षों का वित्तीय अनुदान और मानदेय दिया जाता है।
3. गगनयान और अंतरिक्ष मिशनों में महिला वैज्ञानिक: चंद्रयान-3 और आदित्य-एल1 जैसे ऐतिहासिक राष्ट्रीय अंतरिक्ष अभियानों में भारतीय महिला वैज्ञानिकों के नेतृत्व ने देश की करोड़ों बेटियों को एयरोस्पेस, रोबोटिक्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में सर्वोच्च मुकाम हासिल करने का असीम आत्मविश्वास दिया है।
महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना (MKSP) और कृषि में नेतृत्व
भारत की ग्रामीण कृषि अर्थव्यवस्था में लगभग 80 प्रतिशत कार्यशील महिलाएं खेतों में बुआई, निराई, कटाई, फसल भंडारण और पशुपालन का कठिन कार्य करती हैं। इसके बावजूद भूमि का पट्टा न होने के कारण उन्हें औपचारिक रूप से ‘किसान’ का दर्जा नहीं मिलता था। इस विसंगति को दूर करने के लिए ‘महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना’ (MKSP) लागू की गई है।
इस परियोजना के तहत महिला किसानों को निम्नलिखित सहायता प्रदान की जाती है:
1. गैर-रासायनिक प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण: बायो-पेस्टीसाइड्स, जीवामृत, बीजामृत और देशी बीजों के बैंक स्थापित करने के लिए वित्तीय और तकनीकी मार्गदर्शन।
2. कस्टम हायरिंग सेंटर्स (CHC) का स्वामित्व: महिला समूहों को आधुनिक कृषि उपकरण (ट्रैक्टर, कल्टीवेटर, रीपर, थ्रेशर) खरीदने के लिए 80 प्रतिशत तक सरकारी सब्सिडी दी जाती है, जिसे वे किराए पर देकर लाखों रुपये का मुनाफा कमाती हैं।
3. कृषि उपज का सीधे विपणन और ई-नाम (e-NAM) लिंकेज: महिला किसान अपने उत्पादों को मंडियों के आढ़तियों के शोषण से बचकर डिजिटल राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM) पर सीधे राष्ट्रीय स्तर के व्यापारियों को लाभकारी मूल्य पर बेच रही हैं।
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) और मातृत्व सुरक्षा
गर्भावस्था के दौरान उच्च जोखिम वाले मामलों (High-Risk Pregnancies – HRP) की समय रहते पहचान करना मातृ और शिशु मृत्यु को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है। इसके लिए देश भर में ‘प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान’ (PMSMA) चलाया जा रहा है।
इस अभियान के प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित हैं:
1. प्रत्येक माह की 9 तारीख को विशेष क्लिनिक: देश के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों में हर महीने की 9 तारीख को विशेष जांच शिविर आयोजित किए जाते हैं।
2. विशेषज्ञ स्त्री रोग विशेषज्ञों (Gynecologists) द्वारा परीक्षण: निजी और सरकारी क्षेत्रों के विशेषज्ञ डॉक्टर निःशुल्क अल्ट्रासाउंड, हीमोग्लोबिन, रक्त शर्करा, रक्तचाप और यूरिन की जांच करते हैं।
3. स्टिकर-आधारित जोखिम पहचान: मातृ एवं बाल सुरक्षा कार्ड पर हरे, नीले और लाल रंग के स्टिकर लगाकर उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को तुरंत चिह्नित किया जाता है और उनके लिए विशेष निगरानी व उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफरल की अग्रिम व्यवस्था की जाती है।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना और एकल महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा
भारतीय समाज में पति की असामयिक मृत्यु के पश्चात विधवा, परित्यक्त और एकल महिलाओं को अत्यधिक आर्थिक अभाव, पारिवारिक उपेक्षा और सामाजिक असुरक्षा का सामना करना पड़ता था। इस गंभीर मानवीय संकट के स्थायी समाधान हेतु राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के अंतर्गत ‘इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना’ (IGNWPS) का संचालन किया जा रहा है।
इस योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन यापन करने वाली 40 से 79 वर्ष की आयु की निराश्रित विधवा महिलाओं को केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त सहयोग से प्रतिमाह प्रत्यक्ष पेंशन सहायता प्रदान की जाती है। पेंशन राशि सीधे लाभार्थी महिला के बैंक खाते में डीबीटी (DBT) के माध्यम से बिना किसी बिचौलिए के जमा होती है। 80 वर्ष या उससे अधिक आयु पूरी होने पर यह पेंशन राशि स्वतः बढ़कर वरिष्ठ नागरिक पेंशन के उच्चतम स्लैब में परिवर्तित हो जाती है। यह मासिक वित्तीय संबल असहाय एकल महिलाओं को अपनी बुनियादी दैनिक आवश्यकताओं, पौष्टिक आहार और नियमित दवाओं के लिए किसी अन्य पारिवारिक सदस्य पर निर्भर रहने की विवशता से मुक्ति दिलाकर जीवन संध्या में आत्मसम्मान और सामाजिक गरिमा प्रदान करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. उज्ज्वला योजना 2.0 में आवेदन करने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज आवश्यक हैं?
उज्ज्वला योजना में आवेदन हेतु महिला का आधार कार्ड, परिवार का राशन कार्ड (या 14 सूत्रीय परिवार घोषणा पत्र), बैंक खाता संख्या (जो आधार से अनिवार्य रूप से लिंक हो) और पासपोर्ट साइज फोटो आवश्यक होते हैं।
2. क्या सुकन्या समृद्धि खाता किसी अन्य शहर या डाकघर में ट्रांसफर कराया जा सकता है?
हां, यदि अभिभावक या परिवार का किसी अन्य शहर या राज्य में स्थानांतरण होता है, तो सुकन्या समृद्धि खाता देश भर के किसी भी डाकघर या अधिकृत बैंक शाखा में बिना किसी शुल्क के आसानी से स्थानांतरित (Transfer) कराया जा सकता है।
3. मातृ वंदना योजना (PMMVY) का लाभ सरकारी नौकरी करने वाली महिलाएं ले सकती हैं?
नहीं, केंद्र या राज्य सरकार अथवा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) में कार्यरत वे महिलाएं जिन्हें सेवा नियमों के तहत पहले से सवेतन मातृत्व अवकाश (Paid Maternity Leave) प्राप्त होता है, वे इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं। यह योजना असंगठित क्षेत्र और निर्धन महिलाओं के लिए है।
4. सुकन्या समृद्धि खाते में यदि किसी वर्ष न्यूनतम 250 रुपये जमा न हो सकें, तो क्या खाता बंद हो जाता है?
यदि किसी वित्तीय वर्ष में न्यूनतम 250 रुपये जमा नहीं किए जाते, तो खाता ‘डिफ़ॉल्ट’ हो जाता है। इसे पुनः सक्रिय करने के लिए प्रत्येक चूके हुए वर्ष के लिए मात्र 50 रुपये का जुर्माना और उस वर्ष की न्यूनतम 250 रुपये की राशि जमा करके आसानी से नियमित किया जा सकता है।
5. ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना के तहत महिलाओं का चयन कैसे होता है?
ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के अंतर्गत सक्रिय स्वयं सहायता समूहों में से कुशल और इच्छुक महिला सदस्यों को क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) द्वारा अनुशंसित किया जाता है। इसके पश्चात नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा मान्यता प्राप्त रिमोट पायलट ट्रेनिंग संस्थानों में उन्हें 15 दिनों का विशेष ड्रोन पायलट प्रशिक्षण दिया जाता है।
6. क्या वन स्टॉप सेंटर (सखी केंद्र) में जाने के लिए कोई पुलिस रिपोर्ट अनिवार्य है?
बिल्कुल नहीं। कोई भी पीड़ित महिला सीधे सखी केंद्र जा सकती है या 181 पर कॉल कर सकती है। वहां पहले उसे प्राथमिक उपचार, परामर्श और मानसिक संबल दिया जाता है, और यदि वह चाहे तो उसकी सहमति से ही पुलिस कार्रवाई और विधिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है।
7. क्या सुकन्या समृद्धि योजना में ऑनलाइन पैसे जमा किए जा सकते हैं?
हां, डाक विभाग के ‘आईपीपीबी’ (India Post Payments Bank) मोबाइल बैंकिंग ऐप या बैंकों की नेट बैंकिंग और यूपीआई के माध्यम से घर बैठे आसानी से सुकन्या समृद्धि खाते में ऑनलाइन धनराशि जमा की जा सकती है।
8. क्या उज्ज्वला योजना में गैस चूल्हा और पाइप भी फ्री मिलता है?
हां, उज्ज्वला 2.0 के तहत केंद्र सरकार द्वारा नया गैस कनेक्शन, भरा हुआ सिलेंडर, सुरक्षा होज पाइप और आईएसआई मार्क गैस चूल्हा पहली बार पूरी तरह निःशुल्क प्रदान किया जाता है।
निष्कर्ष: विकसित भारत की आधारशिला नारी शक्ति
इक्कीसवीं सदी का भारत एक अभूतपूर्व सामाजिक पुनर्जागरण के दौर से गुजर रहा है जहां महिलाएं अब विकास के अवसरों की याचक नहीं बल्कि राष्ट्र-निर्माण की अग्रदूत बन चुकी हैं। उज्ज्वला योजना ने जिस चूल्हे के धुएं से ग्रामीण माताओं को मुक्ति दिलाई, सुकन्या समृद्धि ने जिस नन्हीं बेटी के भविष्य को आर्थिक मजबूती दी, मातृ वंदना ने जिस गर्भस्थ शिशु के पोषण को सुनिश्चित किया, और लखपति दीदी अभियान ने जिस साधारण ग्रामीण गृहिणी को ड्रोन पायलट और सफल उद्यमी में बदला—ये सभी उपलब्धियां केवल सरकारी आंकड़ों का संग्रह नहीं हैं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के आत्मसम्मान और गौरव की सजीव गाथा हैं। जब देश की नारी शक्ति शिक्षित, स्वस्थ, आर्थिक रूप से स्वावलंबी और सुरक्षित होती है, तो समाज की हर बुराई स्वतः समाप्त हो जाती है और राष्ट्र की प्रगति को कोई रोक नहीं सकता। यह समग्र महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण तंत्र ‘विकसित भारत 2047’ के परम लक्ष्य को प्राप्त करने का सबसे प्रकाशमान और अजेय प्रकाशस्तंभ है।


