मानव जीवन में रोटी और कपड़े के बाद ‘मकान’ (सुरक्षित आश्रय) केवल ईंट, गारे और सीमेंट की चारदीवारी मात्र नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के आत्म-सम्मान, सामाजिक प्रतिष्ठा, पारिवारिक सुरक्षा और भविष्य की आशाओं का सबसे पवित्र अधिष्ठान है। तपती धूप, कड़ाके की ठंड, आंधी-तूफान और मूसलाधार बारिश के समय टपकती हुई छतों और कच्चे झोपड़ों में रातें गुजारने की पीड़ा केवल वही परिवार समझ सकता है जिसके सिर पर एक पक्की छत का संबल नहीं होता। भारत में सदियों से लाखों गरीब, दलित, वंचित और श्रमिक परिवार पीढ़ी-दर-पीढ़ी कच्चे, असुरक्षित और जर्जर झोपड़ों में रहने को विवश थे जहां न तो महिलाओं के लिए कोई निजता थी, न स्वच्छता और न ही बच्चों के पढ़ने का सुरक्षित वातावरण।
देश के प्रत्येक बेघर और कच्चे तथा जीर्ण-शीर्ण मकानों में रहने वाले परिवार को सभी बुनियादी नागरिक सुविधाओं (शौचालय, बिजली, नल का पानी और स्वच्छ रसोई गैस) से युक्त एक पक्का मकान उपलब्ध कराने के ऐतिहासिक राष्ट्रीय संकल्प के साथ भारत सरकार ने ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ (Pradhan Mantri Awas Yojana – PMAY) का शुभारंभ किया। इस महापरियोजना को देश की भौगोलिक और जनसांख्यिकीय आवश्यकताओं के अनुसार दो मुख्य भागों में विभाजित किया गया है: ग्रामीण भारत के लिए ‘प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण’ (PMAY-G) और शहरी क्षेत्रों के लिए ‘प्रधानमंत्री आवास योजना – शहरी’ (PMAY-U)। अब तक इस योजना के माध्यम से देश भर में 4 करोड़ से अधिक पक्के मकान बनाकर गरीबों को सौंपे जा चुके हैं जो विश्व के इतिहास में सबसे बड़ा आवासीय पुनर्वास अभियान है। हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अतिरिक्त 3 करोड़ नए पक्के मकानों (2 करोड़ ग्रामीण और 1 करोड़ शहरी) के निर्माण को वित्तीय मंजूरी प्रदान की है। इस विस्तृत शोधपरक आलेख में हम पीएम आवास योजना के ग्रामीण व शहरी घटकों, क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (CLSS), पात्रता निर्धारण (आवास+ ऐप), जियो-टैगिंग प्रक्रिया, वित्तीय सहायता राशि, महिला सशक्तिकरण और ऑनलाइन आवेदन के प्रत्येक चरण का संपूर्ण विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण (PMAY-G): ग्रामीण भारत की आवासीय कायापलट
पूर्ववर्ती ‘इंदिरा आवास योजना’ (IAY) की संरचनात्मक कमियों, बिचौलियों और अपारदर्शिता को दूर करते हुए 20 नवंबर 2016 को आगरा (उत्तर प्रदेश) से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण’ का पुनर्गठन कर शुभारंभ किया गया। इसका प्राथमिक लक्ष्य ‘2024 तक सभी के लिए आवास’ (Housing for All) सुनिश्चित करना था जिसे अब 2029 तक विस्तारित कर 2 करोड़ अतिरिक्त ग्रामीण परिवारों को पक्के घर देने का नया लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
पीएमएवाई-जी की सबसे प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
– मकान का न्यूनतम आकार 20 वर्ग मीटर से बढ़ाकर ’25 वर्ग मीटर’ (लगभग 270 वर्ग फीट) कर दिया गया है जिसमें एक स्वच्छ रसोईघर का स्थान अनिवार्य रूप से शामिल है।
– मैदानी क्षेत्रों में मकान निर्माण हेतु ‘1,20,000 रुपये’ (1.20 लाख) की एकमुश्त शत-प्रतिशत अनुदान सहायता दी जाती है (केंद्र और राज्य का अनुपात 60:40)।
– पूर्वोत्तर राज्यों (असम, अरुणाचल आदि), हिमालयी राज्यों (उत्तराखंड, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर) और कठिन/दुर्गम क्षेत्रों में यह वित्तीय सहायता ‘1,30,000 रुपये’ (1.30 लाख) है (केंद्र और राज्य का अनुपात 90:10)।
– सहायता राशि किसी नकद या चेक के रूप में नहीं बल्कि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में निर्माण के विभिन्न चरणों (नींव, लिंटल, छत और पूर्णता) के भौतिक सत्यापन के बाद डीबीटी (DBT) के माध्यम से 3 से 4 किस्तों में जमा की जाती है। ग्रामीण आवास नीतियों और दिशा-निर्देशों का प्रामाणिक संदर्भ ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध है।
अन्य योजनाओं के साथ अभिसरण (Convergence): संपूर्ण सुविधायुक्त घर
प्रधानमंत्री आवास योजना केवल एक खाली कमरा नहीं देती, बल्कि यह कई अन्य प्रमुख केंद्रीय कल्याणकारी योजनाओं के साथ ‘कन्वर्जेंस’ (अभिसरण) करके एक संपूर्ण और गरिमापूर्ण जीवन इकाई का निर्माण करती है:
1. मनरेगा (MGNREGA) से अकुशल मजदूरी: मकान निर्माण में काम करने के लिए लाभार्थी को मनरेगा के तहत 90 से 95 मानव दिवसों की अकुशल मजदूरी (लगभग 20,000 से 25,000 रुपये अतिरिक्त) सीधे उसके खाते में दी जाती है।
2. स्वच्छ भारत मिशन (SBM-G) से शौचालय: खुले में शौच से मुक्ति और पारिवारिक गरिमा हेतु पक्के शौचालय के निर्माण के लिए 12,000 रुपये की अतिरिक्त वित्तीय सहायता दी जाती है।
3. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना: नए पक्के मकान में धुएं से मुक्ति हेतु निःशुल्क एलपीजी गैस कनेक्शन और चूल्हा प्रदान किया जाता है।
4. सौभाग्य योजना: घर में निःशुल्क बिजली का मीटर और वायरिंग कनेक्शन उपलब्ध कराया जाता है।
5. जल जीवन मिशन: ‘हर घर जल’ के तहत मकान के भीतर पीने के शुद्ध नल जल का कनेक्शन जोड़ा जाता है।
इस प्रकार एक साधारण ग्रामीण परिवार को पक्के मकान के निर्माण के साथ-साथ कुल मिलाकर लगभग 1.6 लाख से 1.7 लाख रुपये तक का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष समग्र सरकारी लाभ प्राप्त होता है।
पात्रता निर्धारण तंत्र: सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना और ‘आवास प्लस’ ऐप
पीएमएवाई-जी में लाभार्थियों का चयन किसी नेता या ग्राम प्रधान की सिफारिश पर नहीं, बल्कि पूर्णतः पारदर्शी वैज्ञानिक प्रणाली पर आधारित है। मूल सूची सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना 2011 (SECC 2011) के 13 बहिष्करण मानकों (Exclusion Criteria) और ग्राम सभा द्वारा सत्यापित अभाव श्रेणियों के आधार पर तैयार की गई थी।
जो गरीब परिवार 2011 की जनगणना सूची में छूट गए थे, उनके लिए सरकार ने 2018 में ‘आवास प्लस’ (Awaas+ Mobile App) सर्वेक्षण आयोजित किया जिसमें छूटे हुए पात्र परिवारों का नया डिजिटल डेटाबेस तैयार किया गया। हाल ही में 2024 में नए 2 करोड़ ग्रामीण मकानों के आवंटन हेतु आवास प्लस पोर्टल को पुनः खोला गया है।
निम्नलिखित संपत्तियां रखने वाले परिवारों को योजना से स्वतः बाहर (Ineligible) रखा गया है:
– जिन परिवारों के पास तिपहिया या चार पहिया वाहन, मोटरबोट या ट्रैक्टर है।
– जिन परिवारों के पास 50,000 रुपये या उससे अधिक की ऋण सीमा वाला किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) है।
– वे परिवार जिनका कोई सदस्य सरकारी नौकरी (नियमित या सेवानिवृत्त) में है।
– वे परिवार जो व्यावसायिक कर या आयकर का भुगतान करते हैं।
– जिन परिवारों के पास रेफ्रिजरेटर, लैंडलाइन फोन या 2.5 एकड़ से अधिक सिंचित भूमि है।
– जिनके पास पहले से ही कोई पक्का मकान मौजूद है। आधिकारिक लाभार्थी सूची और जियो-टैगिंग की प्रगति का विवरण पीएमएवाई-ग्रामीण आधिकारिक पोर्टल पर देखा जा सकता है।
पक्के मकान का सपना साकार होने से देश के करोड़ों वंचित परिवारों को सुरक्षा, आत्मसम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त हुई है।
जियो-टैगिंग और ‘आवास-सॉफ्ट’ (AwaasSoft): भ्रष्टाचार पर डिजिटल ताला
पूर्ववर्ती योजनाओं में कागजों पर मकान बन जाने और अधिकारियों द्वारा धन गबन करने की गंभीर शिकायतें आती थीं। पीएम आवास योजना में भ्रष्टाचार को शून्य करने के लिए अंतरिक्ष विज्ञान और आईटी तकनीक का अभूतपूर्व समन्वय किया गया है। संपूर्ण प्रक्रिया ‘आवास-सॉफ्ट’ (AwaasSoft) वेब-आधारित ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म और ‘आवास-ऐप’ (AwaasApp) द्वारा नियंत्रित होती है।
मकान निर्माण के चार महत्वपूर्ण चरणों पर स्वतंत्र अधिकारियों द्वारा स्मार्टफोन से जियो-टैगिंग (Geo-Tagging) की जाती है:
1. निर्माण आरंभ से पूर्व (वर्तमान कच्ची जमीन / कच्चे मकान का अक्षांश-देशांतर सहित फोटो)।
2. नींव (Plinth Level) पूरी होने पर।
3. लिंटल स्तर (खिड़की-दरवाजे का स्तर) पूरा होने पर।
4. छत (Roof Cast) ढलने और मकान के पूर्ण तैयार होने पर।
प्रत्येक फोटो में जीपीएस अक्षांश, देशांतर और समय की मुहर (Time-Stamp) स्वतः दर्ज होती है जो इसरो के ‘भुवन’ उपग्रह प्लेटफॉर्म से सत्यापित होती है। जब तक पिछले चरण की जियो-टैग फोटो केंद्रीय सर्वर पर अपलोड नहीं होती, बैंक प्रणाली स्वतः अगली किस्त का भुगतान रोक देती है। इस तकनीक ने बिचौलियों और फर्जीवाड़े को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया है।
प्रधानमंत्री आवास योजना – शहरी 2.0 (PMAY-U 2.0): शहरी गरीबों और मध्यम वर्ग का संबल
25 जून 2015 को आरंभ की गई ‘प्रधानमंत्री आवास योजना – शहरी’ (PMAY-U) का उद्देश्य देश के सभी सांविधिक नगरों और कस्बों में मलिन बस्तियों (स्लम) में रहने वाले गरीबों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS), निम्न आय वर्गों (LIG) और मध्यम आय वर्गों (MIG) को पक्का मकान उपलब्ध कराना है। अगस्त 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आगामी 5 वर्षों के लिए 10 लाख करोड़ रुपये के कुल निवेश और 2.30 लाख करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता के साथ ‘पीएम आवास योजना – शहरी 2.0’ को मंजूरी दी है जिसके तहत 1 करोड़ नए शहरी परिवारों को लाभान्वित किया जाएगा।
शहरी योजना को चार विशिष्ट कार्यक्षेत्रों (Verticals) में क्रियान्वित किया जाता है:
1. इन-सिटू स्लम पुनर्विकास (ISSR): निजी डेवलपर्स की सहायता से मलिन बस्तियों की जमीन पर ही आधुनिक बहुमंजिला इमारतों का निर्माण कर झुग्गीवासियों को वहीं पक्के फ्लैट सौंपना (प्रति घर 1 लाख रुपये की केंद्रीय सहायता)।
2. क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (CLSS / Interest Subsidy Scheme): बैंकों से आवास ऋण लेने पर ब्याज में सीधी सरकारी सब्सिडी (होम लोन पर 4 प्रतिशत तक की ब्याज छूट)।
3. साझेदारी में किफायती आवास (Affordable Housing in Partnership – AHP): राज्य सरकारों और विकास प्राधिकरणों द्वारा निजी क्षेत्र के साथ मिलकर बनाए जाने वाले किफायती आवासीय प्रोजेक्ट्स (प्रति घर 1.5 लाख रुपये की केंद्रीय सहायता)।
4. लाभार्थी-नेतृत्व वाला व्यक्तिगत आवास निर्माण (BLC): जिन परिवारों के पास अपनी निजी जमीन है, उन्हें स्वयं अपना पक्का मकान बनाने या मौजूदा कच्चे मकान को पक्का करने हेतु 1.5 लाख रुपये की सीधी केंद्रीय सहायता दी जाती है। शहरी आवास नीतियों और ऑनलाइन डैशबोर्ड का अध्ययन आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध है।
क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (CLSS) और ब्याज सब्सिडी संरचना
शहरी मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा परिवारों के लिए अपने सपनों का घर खरीदने में होम लोन की ब्याज दरें सबसे बड़ी बाधा बनती हैं। सीएलएसएस घटक के तहत केंद्र सरकार वाणिज्यिक बैंकों, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों से लिए गए होम लोन पर अग्रिम ब्याज सब्सिडी प्रदान करती है।
पीएमएवाई-यू 2.0 के अंतर्गत ब्याज सब्सिडी योजना (ISS) के तहत 35 लाख रुपये तक के मूल्य वाले मकान के लिए 25 लाख रुपये तक के होम लोन पर 12 वर्षों की अवधि हेतु 4 प्रतिशत की सीधी ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाती है। यह सब्सिडी अधिकतम 1.80 लाख रुपये तक होती है जिसे 5-वार्षिक किस्तों में सीधे लाभार्थी के लोन खाते में क्रेडिट कर दिया जाता है। इससे लाभार्थी की मासिक ईएमआई (EMI) में भारी कमी आती है और वह आसानी से अपने घर का मालिकाना हक प्राप्त कर लेता है।
महिला सशक्तिकरण: घर की मालकिन बनीं देश की महिलाएं
प्रधानमंत्री आवास योजना का एक सबसे क्रांतिकारी और दूरगामी सामाजिक प्रभाव देश की करोड़ों महिलाओं का वास्तविक सशक्तिकरण है। भारतीय समाज में ऐतिहासिक रूप से अचल संपत्ति (मकान, जमीन) पुरुषों के नाम पर ही होती थी जिससे महिलाएं आर्थिक रूप से पूर्णतः पराधीन रहती थीं।
पीएम आवास योजना में सरकार ने यह कानूनी अनिवार्यता लागू की है कि योजना के तहत बनने वाले पक्के मकान का मालिकाना हक अनिवार्य रूप से ‘परिवार की महिला मुखिया के नाम पर’ अथवा ‘पति-पत्नी के संयुक्त नाम पर’ ही पंजीकृत होगा। आज देश भर में बने 4 करोड़ से अधिक मकानों में से 75 प्रतिशत से अधिक मकानों की एकमात्र या संयुक्त मालकिन महिलाएं हैं। इस नीति ने महिलाओं को पारिवारिक निर्णय लेने की शक्ति, गरिमा, सामाजिक सुरक्षा और भविष्य में किसी भी आकस्मिक विपत्ति के समय एक मजबूत संबल प्रदान किया है।
पीएम आवास योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया (चरण-दर-चरण गाइड)
शहरी क्षेत्र के पात्र नागरिक जो अपना नया मकान बनाना चाहते हैं अथवा ब्याज सब्सिडी का लाभ लेना चाहते हैं, वे आधिकारिक पोर्टल (pmaymis.gov.in) अथवा कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं:
ऑनलाइन आवेदन के प्रमुख चरण:
1. आधिकारिक पोर्टल (pmaymis.gov.in) पर जाएं और ‘Citizen Assessment’ विकल्प पर क्लिक करें।
2. अपनी आवश्यकता के अनुसार विकल्प चुनें: ‘Benefit under other 3 verticals’ (यदि निजी जमीन पर निर्माण करना है या भागीदारी आवास) अथवा ‘Slum Dwellers’ (यदि झुग्गी में रहते हैं)।
3. अपना 12-अंकों का आधार नंबर और आधार कार्ड में दर्ज सटीक नाम प्रविष्ट करें और ‘Check’ पर क्लिक करें।
4. आधार सत्यापन सफल होने पर विस्तृत आवेदन फॉर्म स्क्रीन पर खुलेगा। इसमें अपना राज्य, जिला, शहर, वर्तमान व स्थायी पता, परिवार के सदस्यों के नाम व आयु, मासिक पारिवारिक आय, बैंक खाता विवरण और मौजूदा मकान की स्थिति (कच्चा/किराये का) ध्यानपूर्वक भरें।
5. घोषणा पत्र (Disclaimer) पर टिक करें, कैप्चा कोड दर्ज करें और ‘Save’ बटन पर क्लिक करें।
6. आवेदन सफलतापूर्वक जमा होने पर एक विशिष्ट ‘आवेदन क्रमांक’ (Application ID) स्क्रीन पर प्रदर्शित होगा। इसे सुरक्षित नोट कर लें और आवेदन पत्र का प्रिंटआउट निकालकर रख लें।
7. स्थानीय नगर पालिका या विकास प्राधिकरण द्वारा दस्तावेजों और स्थल का भौतिक सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन के उपरांत पात्र पाए जाने पर लाभार्थी सूची में नाम जुड़ जाता है और स्वीकृति आदेश जारी होता है।
पीएमएवाई-ग्रामीण एवं पीएमएवाई-शहरी 2.0 का समग्र तुलनात्मक विश्लेषण
भारत सरकार के आवासीय महाभियान के दोनों घटक ग्रामीण और शहरी जीवन की विशिष्ट चुनौतियों और वित्तीय आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किए गए हैं। नीचे दी गई तालिका में इन दोनों प्रणालियों का विस्तृत तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है:
| तुलना मानक | प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण (PMAY-G) | प्रधानमंत्री आवास योजना – शहरी 2.0 (PMAY-U) |
| नोडल मंत्रालय | ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development) | आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) |
| वित्तीय सहायता स्वरूप | मैदानी क्षेत्र: 1.20 लाख; पहाड़ी/कठिन क्षेत्र: 1.30 लाख (100% प्रत्यक्ष अनुदान) | बीएलसी हेतु 1.50 लाख अनुदान; अथवा होम लोन पर 1.80 लाख तक 4% ब्याज सब्सिडी |
| कन्वर्जेंस लाभ | मनरेगा से 90-95 दिन मजदूरी + स्वच्छ भारत से 12,000 शौचालय सहायता | अमृत 2.0 और स्वच्छ भारत (शहरी) से सीवरेज व नल जल एकीकरण |
| मकान का न्यूनतम आकार | न्यूनतम 25 वर्ग मीटर (रसोईघर सहित) | न्यूनतम 30 वर्ग मीटर कारपेट एरिया (कमरा, हॉल, रसोई, शौचालय) |
| सत्यापन एवं निगरानी | आवास-सॉफ्ट व भुवन उपग्रह द्वारा 4 चरणों में जियो-टैगिंग | थर्ड पार्टी क्वालिटी मॉनिटरिंग (TPQMA) व जियो-टैग मैपिंग |
| मालिकाना हक की शर्त | परिवार की महिला मुखिया के नाम पर अथवा संयुक्त नाम पर अनिवार्य | महिला मुखिया के नाम पर अथवा संयुक्त नाम पर अनिवार्य (ईडब्ल्यूएस/एलआईजी) |
यह तुलनात्मक विश्लेषण स्पष्ट करता है कि भारत सरकार का आवास मॉडल भारत के प्रत्येक भौगोलिक क्षेत्र की विशिष्ट आर्थिक वास्तविकताओं के अनुसार अत्यंत वैज्ञानिक और व्यावहारिक रूप से संरचित किया गया है।
ग्लोबल हाउसिंग टेक्नोलॉजी चैलेंज (GHTC-India) और लाइटहाउस प्रोजेक्ट्स
लाखों मकानों का तेजी से, पर्यावरण-अनुकूल और आपदा-रोधी निर्माण करने के लिए भारत सरकार ने ‘ग्लोबल हाउसिंग टेक्नोलॉजी चैलेंज’ (GHTC-India) की शुरुआत की। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया भर की सबसे उन्नत, टिकाऊ और तीव्र निर्माण प्रौद्योगिकियों को भारत में लाना था ताकि पारंपरिक ईंट-गारे के निर्माण में लगने वाले महीनों के समय को घटाकर कुछ ही सप्ताह किया जा सके।
इस पहल के तहत देश के छह विभिन्न राज्यों और भूकंपीय क्षेत्रों में छह ‘लाइटहाउस प्रोजेक्ट्स’ (Lighthouse Projects – LHPs) का सफल निर्माण किया गया है:
1. इंदौर (मध्य प्रदेश): प्रीफैब्रिकेटेड सैंडविच पैनल सिस्टम द्वारा निर्माण।
2. राजकोट (गुजरात): मोनोलिथिक कंक्रीट निर्माण तकनीक जिसमें सुरंग के आकार के फॉर्मवर्क (टनल फॉर्मवर्क) का उपयोग हुआ।
3. चेन्नई (तमिलनाडु): प्रीकास्ट कंक्रीट कंस्ट्रक्शन सिस्टम जो अमेरिका और फिनलैंड की तकनीक पर आधारित है।
4. रांची (झारखंड): 3डी प्रीकास्ट वॉल्यूमेट्रिक कंक्रीट तकनीक।
5. अगरतला (त्रिपुरा): लाइट गेज स्टील स्ट्रक्चरल सिस्टम जो भूकंप-रोधी और अत्यधिक हल्का है।
6. लखनऊ (उत्तर प्रदेश): स्टे-इन-प्लेस फॉर्मवर्क तकनीक जो कनाडा की तकनीक पर आधारित है।
ये अत्याधुनिक तकनीकें न केवल मकानों को भूकंप, चक्रवात और आग से पूरी तरह सुरक्षित बनाती हैं बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी लाती हैं। भविष्य में देश के सभी सरकारी और किफायती आवासीय प्रोजेक्ट्स में इन आधुनिक प्रौद्योगिकियों का ही उपयोग किया जाएगा।
अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कॉम्प्लेक्स (ARHCs): प्रवासी शहरी श्रमिकों के लिए वरदान
कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान जब लाखों प्रवासी श्रमिक बड़े शहरों से अपने गांवों की ओर पैदल पलायन करने को विवश हुए थे, तो यह कड़वी सच्चाई सामने आई थी कि शहरों में उनके पास रहने के लिए कोई किफायती, स्वच्छ और सुरक्षित किराये का मकान नहीं था। इस मानवीय संकट के स्थायी समाधान के लिए केंद्र सरकार ने पीएम आवास योजना (शहरी) के तहत ‘अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कॉम्प्लेक्स’ (ARHCs) योजना आरंभ की।
यह योजना शहरों में औद्योगिक श्रमिकों, दिहाड़ी मजदूरों, रेहड़ी-पटरी वालों, रिक्शा चालकों और छात्रों को उनके कार्यस्थल के समीप न्यूनतम किराये (Affordable Rent) पर स्वच्छ और आधुनिक आवास प्रदान करती है। इसके दो मॉडल हैं: पहला, पूर्ववर्ती जेएनएनयूआरएम और राजीव आवास योजना के तहत बने खाली पड़े सरकारी फ्लैट्स को पीपीपी मॉडल पर मरम्मत कराकर किराये के परिसरों में बदलना; और दूसरा, निजी और सार्वजनिक संस्थाओं को अपनी खाली जमीन पर डॉर्मिटरी और वन-बीएचके किराये के कॉम्प्लेक्स बनाने हेतु कर छूट और रियायती ऋण प्रोत्साहन देना। यह योजना शहरों में झुग्गियों के फैलाव को रोकती है और शहरी श्रमिकों को गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करती है।
आवासीय निर्माण क्षेत्र का आर्थिक गुणक प्रभाव (Economic Multiplier Effect)
आवास और निर्माण क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता क्षेत्र है जो देश के सकल घरेलू उत्पाद में प्रत्यक्ष रूप से 7 से 8 प्रतिशत का योगदान देता है। पीएम आवास योजना केवल गरीबों को मकान ही नहीं दे रही है, बल्कि यह संपूर्ण राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में एक विशाल ‘गुणक प्रभाव’ (Multiplier Effect) उत्पन्न कर रही है।
एक मकान के निर्माण के साथ 250 से अधिक सहायक उद्योग (जैसे सीमेंट, स्टील, ईंट, बालू, पेंट, सेनेटरी वेयर, कांच, टाइल्स, बिजली के तार और फिटिंग्स) सीधे तौर पर जुड़े होते हैं। 4 करोड़ से अधिक मकानों के निर्माण ने लाखों टन सीमेंट और इस्पात की भारी घरेलू मांग उत्पन्न की है जिससे कारखाने पूरी क्षमता से चले हैं। इसके अतिरिक्त स्थानीय स्तर पर राजमिस्त्री, बढ़ई, प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, वेल्डर और लाखों अकुशल मजदूरों को उनके अपने गांव और कस्बे में ही वर्षों तक निरंतर प्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हुआ है। महिला राजमिस्त्रियों को ‘रानी मिस्त्री’ के रूप में विशेष प्रशिक्षण देकर ग्रामीण निर्माण क्षेत्र में लैंगिक समानता की नई मिसाल कायम की गई है। इस आवासीय क्रांति ने देश की आर्थिक संवृद्धि को जमीनी स्तर पर अभूतपूर्व तरलता और गतिशीलता प्रदान की है।
पारिस्थितिक संतुलन और हरित भवन मानक (Green Building Standards)
जलवायु परिवर्तन और बढ़ते वैश्विक तापमान के इस दौर में पीएम आवास योजना के तहत बनने वाले पक्के मकानों को केवल मजबूत ही नहीं बल्कि ‘पर्यावरण-अनुकूल’ (Eco-Friendly) और ऊर्जा-दक्ष बनाया जा रहा है। सरकार ने राष्ट्रीय भवन निर्माण संहिता (NBC 2016) के हरित भवन मानकों को इन किफायती मकानों में लागू किया है।
मकानों के डिजाइन में प्राकृतिक प्रकाश और हवा के सुचारु आवागमन (Cross-Ventilation) का विशेष ध्यान रखा जाता है जिससे दिन के समय बिजली की खपत न्यूनतम होती है। पारंपरिक अत्यधिक ऊर्जा खपत वाली लाल मिट्टी की ईंटों के स्थान पर कोयला बिजली संयंत्रों के कचरे से बनने वाली ‘फ्लाई-ऐश ईंटों’ (Fly-Ash Bricks) और ऑटोकलेव्ड एरेटेड कंक्रीट (AAC) ब्लॉक्स का अनिवार्य उपयोग किया जा रहा है जो मकानों को गर्मियों में ठंडा और सर्दियों में गर्म रखते हैं। इसके अतिरिक्त छत पर वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) और ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ के तहत रूफटॉप सोलर पैनल्स को जोड़कर इन मकानों को शून्य-कार्बन और आत्मनिर्भर ऊर्जा इकाइयों में बदला जा रहा है।
स्वामित्व योजना और पीएम आवास योजना ग्रामीण का ऐतिहासिक अभिसरण
ग्रामीण भारत में दशकों से एक बहुत बड़ी विसंगति यह थी कि ग्रामीण आबादी के पास अपनी पैतृक भूमि या आवासीय भूखंड (आबादी क्षेत्र) का कोई आधिकारिक कानूनी मालिकाना दस्तावेज (Property Card) नहीं होता था। कानूनी पट्टा न होने के कारण बैंक उन्हें आवास निर्माण या मरम्मत हेतु ऋण देने से मना कर देते थे और भूमि विवादों के कारण कई निर्धन परिवार पीएम आवास योजना का लाभ उठाने से वंचित रह जाते थे। इस समस्या का ऐतिहासिक समाधान ‘स्वामित्व योजना’ (Survey of Villages and Mapping with Improvised Technology in Village Areas – SVAMITVA) के माध्यम से निकाला गया।
पंचायती राज मंत्रालय द्वारा संचालित स्वामित्व योजना के अंतर्गत अत्याधुनिक ड्रोन सर्वेक्षण तकनीक द्वारा गांवों के रिहायशी क्षेत्रों का सेंटीमीटर स्तर पर सटीक सीमांकन किया जा रहा है। इसके पश्चात प्रत्येक ग्रामीण परिवार को डिजिटल ‘प्रॉपर्टी कार्ड’ अथवा ‘घरौनी’ प्रदान की जा रही है। जब किसी ग्रामीण परिवार के पास अपनी भूमि का वैध कानूनी स्वामित्व कार्ड होता है, तो वह पीएम आवास योजना ग्रामीण के तहत स्वीकृत अनुदान के साथ-साथ किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक से अतिरिक्त निर्माण कार्य के लिए बेहद कम ब्याज दरों पर संस्थागत गृह ऋण प्राप्त करने में पूरी तरह सक्षम हो जाता है। इस अभिसरण ने ग्रामीण संपत्तियों को वित्तीय परिसंपत्ति में बदल दिया है और ग्रामीण भारत में आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई लहर पैदा की है।
रियल एस्टेट विनियमन अधिनियम (RERA 2016) और आवास खरीदारों का सुरक्षा कवच
शहरी क्षेत्रों में मध्यम और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए अपने जीवन भर की जमा पूंजी से पक्का मकान खरीदना हमेशा से एक अत्यंत जोखिम भरा निर्णय माना जाता था। बिल्डरों द्वारा परियोजनाओं में अत्यधिक देरी करना, निर्माण की घटिया गुणवत्ता, बिना नक्शा पास कराए फ्लैट्स बेचना और खरीदारों के पैसों को दूसरी परियोजनाओं में मोड़ देना आम बात थी। वर्ष 2016 में केंद्र सरकार द्वारा लागू किया गया ‘रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट एक्ट’ (RERA) भारतीय आवास क्षेत्र में सबसे क्रांतिकारी विनियामक सुधार साबित हुआ है।
रेरा कानून ने पीएम आवास योजना (शहरी) के तहत निजी बिल्डरों द्वारा बनाए जा रहे किफायती आवासीय प्रोजेक्ट्स में निवेश करने वाले नागरिकों को अभूतपूर्व सुरक्षा कवच प्रदान किया है। इस कानून के प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित हैं:
1. अनिवार्य पंजीकरण: किसी भी 500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल या 8 से अधिक अपार्टमेंट वाले प्रोजेक्ट को संबंधित राज्य के रेरा प्राधिकरण में पंजीकृत कराना अनिवार्य है।
2. एस्क्रो अकाउंट (Escrow Account): बिल्डर को खरीदारों से एकत्र की गई कुल धनराशि का कम से कम 70 प्रतिशत एक अलग बैंक खाते में जमा रखना होता है, जिसका उपयोग केवल उसी प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य और भूमि लागत के लिए किया जा सकता है।
3. कारपेट एरिया पर बिक्री: बिल्डरों द्वारा पहले उपयोग किए जाने वाले भ्रामक ‘सुपर एरिया’ की प्रथा को समाप्त कर अब केवल स्पष्ट ‘कारपेट एरिया’ (आंतरिक फर्श क्षेत्रफल) के आधार पर ही मकानों का मूल्य तय किया जाता है।
4. 5 वर्ष की संरचनात्मक वारंटी: निर्माण पूरा होने और पजेशन मिलने के पांच वर्षों के भीतर यदि भवन में कोई भी संरचनात्मक दोष या निर्माण संबंधी खराबी सामने आती है, तो बिल्डर को 30 दिनों के भीतर बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के अपने खर्च पर उसकी मरम्मत करनी होगी।
5. समय पर पजेशन न देने पर जुर्माना: यदि बिल्डर अनुबंध में तय समय सीमा के भीतर मकान का कब्जा नहीं सौंपता है, तो उसे खरीदार को बैंक के उच्चतम ब्याज दर के बराबर मासिक ब्याज चुकाना पड़ता है या खरीदार को पूरा पैसा ब्याज सहित वापस करना होता है।
स्वामीह फंड (SWAMIH Fund): अटकी आवासीय परियोजनाओं में नई जान
देश भर के प्रमुख महानगरों और टीयर-2 शहरों में वर्षों से लाखों मध्यमवर्गीय परिवार ऐसे फ्लैट्स की ईएमआई भर रहे थे जिनका निर्माण बिल्डरों के दिवालिया होने या वित्तीय संकट के कारण बीच में ही ठप पड़ गया था। इन बेबस होम बायर्स को राहत पहुंचाने और किफायती आवास क्षेत्र को गति देने के लिए सरकार ने नवंबर 2019 में 25,000 करोड़ रुपये के कोष के साथ ‘स्वामीह फंड’ (Special Window for Affordable and Mid-Income Housing – SWAMIH Investment Fund I) की स्थापना की।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी (SBICAP Ventures) द्वारा प्रबंधित यह फंड भारत का सबसे बड़ा सामाजिक प्रभाव वैकल्पिक निवेश कोष (AIF) है। यह फंड उन अधूरी किफायती और मध्यम आय वाली आवासीय परियोजनाओं को अंतिम चरण का वित्तीय पोषण (Last-mile Funding) प्रदान करता है जो रेरा में पंजीकृत हैं और वित्तीय संकट के कारण रुक गई थीं। स्वामीह फंड के माध्यम से अब तक देश भर में 50,000 से अधिक अटके हुए मकानों का निर्माण पूरा कर हताश परिवारों को उनकी चाबियां सौंपी जा चुकी हैं और आगामी वर्षों में 80,000 से अधिक अन्य मकानों को पूर्ण करने का लक्ष्य है। इसने किफायती आवास बाजार में नागरिकों का विश्वास पुनर्स्थापित किया है।
क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (CRGFTLIH) और बैंकिंग समावेशन
निम्न आय वर्ग (LIG) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के परिवारों को होम लोन देने में पारंपरिक वाणिज्यिक बैंक प्रायः कतराते थे क्योंकि इन परिवारों के पास कोई औपचारिक आय प्रमाण पत्र (जैसे आईटीआर या सैलरी स्लिप) नहीं होता था। इस वित्तीय असमानता को दूर करने के लिए आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय ने नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB) के सहयोग से ‘क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर लो इनकम हाउसिंग’ (CRGFTLIH) की स्थापना की।
इस ट्रस्ट के तहत प्राथमिक ऋणदाता संस्थानों (बैंकों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों) को ईडब्ल्यूएस और एलआईजी श्रेणियों को दिए जाने वाले किफायती होम लोन पर 100 प्रतिशत तक का सरकारी गारंटी कवर प्रदान किया जाता है। यदि कोई निर्धन परिवार किसी अप्रत्याशित संकट के कारण ऋण चुकाने में असमर्थ होता है, तो बैंक के नुकसान की भरपाई यह ट्रस्ट करता है। इस सुदृढ़ वित्तीय तंत्र के कारण देश के सार्वजनिक और निजी बैंकों ने असंगठित क्षेत्र के कामगारों, छोटे दुकानदारों, ऑटो चालकों और घरेलू कामगारों को बिना किसी डर के पीएमएवाई के तहत लाखों करोड़ रुपये के रियायती आवास ऋण वितरित किए हैं, जिससे औपचारिक वित्तीय समावेशन का वास्तविक सपना साकार हुआ है।
आधुनिक आवास निर्माण में स्थानीय स्थापत्य और स्वदेशी तकनीक का समन्वय
भारत एक विशाल भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधताओं वाला देश है जहां हिमालय के बर्फबारी वाले क्षेत्रों से लेकर राजस्थान के तपते रेगिस्तान, तटीय चक्रवाती क्षेत्र और पूर्वोत्तर के भारी मानसूनी इलाके मौजूद हैं। एक ही प्रकार का कंक्रीट का चौकोर मकान इन सभी भिन्न जलवायु क्षेत्रों के लिए अनुकूल नहीं हो सकता। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत भारत सरकार ने ‘पहल’ (PAHAL – Practices, Approaches, Technologies, and Innovations for Housing And Local Habitat) नामक व्यापक स्थापत्य अनुसंधान परियोजना शुरू की।
इसके अंतर्गत देश भर के विभिन्न जलवायु और आपदा क्षेत्रों के लिए 130 से अधिक विशिष्ट क्षेत्रीय मकान डिजाइनों को तैयार किया गया है। उदाहरण के लिए, पहाड़ी और भूकंपीय क्षेत्रों में स्थानीय रूप से उपलब्ध मजबूत चीड़ या बांस की लकड़ी और संपीड़ित मिट्टी के ब्लॉक्स का उपयोग किया जाता है जो भूकंप के झटकों को आसानी से सह लेते हैं। राजस्थान के शुष्क इलाकों में पारंपरिक चूना पत्थर और मोटी मिट्टी की दीवारों का प्रावधान है जो बाहर की 48 डिग्री सेल्सियस की चिलचिलाती गर्मी में भी घर के भीतर स्वाभाविक शीतलता बनाए रखती हैं। इसी प्रकार असम और मेघालय में पारंपरिक ‘चांग घर’ की तर्ज पर ऊंचे बांस के खंभों पर मकान बनाए जाते हैं ताकि मानसूनी बाढ़ का पानी घर के अंदर न घुस सके। यह स्वदेशी स्थापत्य दृष्टिकोण न केवल निर्माण लागत को 20 से 30 प्रतिशत तक घटाता है बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय कारीगरों के पारंपरिक हुनर को भी नया जीवन देता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)
1. क्या जिनके पास जमीन नहीं है, उन्हें भी ग्रामीण आवास योजना का लाभ मिल सकता है?
हां, केंद्र सरकार ने स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं कि जो परिवार पूर्णतः भूमिहीन हैं और जिनके पास मकान बनाने के लिए अपनी जमीन नहीं है, राज्य सरकारों को उन्हें ग्राम समाज की जमीन, बंजर भूमि अथवा सरकारी पट्टा देकर निःशुल्क जमीन का टुकड़ा उपलब्ध कराना अनिवार्य है ताकि वे अपना पक्का मकान बना सकें।
2. क्या अविवाहित व्यक्ति पीएम आवास योजना के लिए आवेदन कर सकता है?
यदि कोई अविवाहित व्यक्ति अपने माता-पिता के परिवार का हिस्सा है और उस परिवार के पास पहले से कोई पक्का मकान है, तो वह अलग से पात्र नहीं होगा। किंतु यदि कोई एकल निराश्रित व्यक्ति, अनाथ, परित्यक्ता महिला, अथवा वरिष्ठ नागरिक स्वतंत्र रूप से रहता है और बेघर है, तो वह स्वतंत्र लाभार्थी के रूप में आवेदन कर सकता है।
3. पीएम आवास योजना की किस्तें कितने समय में बैंक खाते में आ जाती हैं?
मकान निर्माण के प्रत्येक चरण (नींव, लिंटल, छत) के पूरा होने पर जब संबंधित पंचायत सचिव या तकनीकी सहायक द्वारा आवास-ऐप से जियो-टैगिंग फोटो अपलोड की जाती है, तो सत्यापन के 7 से 15 कार्य दिवसों के भीतर अगली किस्त की धनराशि सीधे डीबीटी के जरिए लाभार्थी के बैंक खाते में जमा हो जाती है।
4. क्या पीएम आवास योजना के तहत बने मकान को बेचा या किराये पर दिया जा सकता है?
नहीं, योजना के नियमों के अनुसार यह मकान केवल लाभार्थी परिवार के स्वयं के निवास के लिए होता है। इसे निर्माण पूरा होने के कम से कम 10 से 15 वर्षों तक किसी अन्य व्यक्ति को बेचना या व्यावसायिक उपयोग में लेना पूरी तरह प्रतिबंधित होता है। उल्लंघन करने पर सरकारी सहायता की वसूली की जा सकती है।
5. यदि किसी ने पहले से होम लोन ले रखा है, तो क्या उसे ब्याज सब्सिडी (CLSS) मिल सकती है?
यदि होम लोन योजना की प्रभावी अवधि के दौरान स्वीकृत हुआ है और आवेदक परिवार के पास देश में कहीं भी कोई पक्का मकान नहीं है तथा वह आय वर्ग (EWS/LIG/MIG) के सभी पात्रता मानकों को पूरा करता है, तो वह अपने बैंक के माध्यम से सीएलएसएस ब्याज सब्सिडी का दावा कर सकता है।
6. क्या पीएम आवास योजना में आवेदन करने के लिए कोई दलाल या बिचौलिया आवश्यक है?
कदापि नहीं। पूरी प्रक्रिया 100 प्रतिशत डिजिटल, निःशुल्क और पारदर्शी है। किसी भी व्यक्ति, बिचौलिए या अधिकारी को एक भी रुपया देने की आवश्यकता नहीं है। यदि कोई रिश्वत मांगता है, तो तुरंत जिला कलेक्टर, एंटी-करप्शन ब्यूरो या केंद्रीय हेल्पलाइन 1800-11-6446 पर शिकायत दर्ज करें।
7. क्या पुराने कच्चे मकान की मरम्मत या विस्तार के लिए भी पैसा मिलता है?
हां, पीएमएवाई-शहरी के ‘बीएलसी’ (Beneficiary-led Construction / Enhancement) घटक के तहत मौजूदा कच्चे या जीर्ण-शीर्ण मकान में कम से कम 9 वर्ग मीटर का एक अतिरिक्त पक्का कमरा, रसोईघर या शौचालय बनाकर विस्तार करने हेतु भी सरकारी वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
8. ग्रामीण आवास सूची में अपना नाम ऑनलाइन कैसे चेक करें?
नागरिक आधिकारिक पोर्टल ‘pmayg.nic.in’ पर जाएं, मेनू में ‘Stakeholders’ पर क्लिक कर ‘IAY/PMAYG Beneficiary’ चुनें। अपना रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करें। यदि नंबर न हो, तो ‘Advanced Search’ पर क्लिक कर अपना राज्य, जिला, ब्लॉक, ग्राम पंचायत और नाम चुनकर पूरी ग्राम सूची देख सकते हैं।
9. क्या पीएम आवास योजना में दिव्यांगों और विधवाओं को कोई विशेष प्राथमिकता मिलती है?
हां, योजना की चयन प्रक्रिया में दिव्यांगजनों, विधवा महिलाओं, युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के आश्रितों, और अनुसूचित जाति व जनजाति के परिवारों को सर्वोच्च प्राथमिकता (Top Priority) दी जाती है और उनके आवेदनों को बिना किसी देरी के पहले चरण में स्वीकृत किया जाता है।
निष्कर्ष एवं राष्ट्र-निर्माण में पक्के मकानों का योगदान
प्रधानमंत्री आवास योजना केवल गरीबों के लिए ईंट-पत्थर के मकान खड़े करने का सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्र भारत में सामाजिक सुरक्षा, मानवीय गरिमा और राष्ट्र-निर्माण की सबसे मजबूत आधारशिला है। जब एक निर्धन परिवार को अपने सिर पर एक पक्की, सुरक्षित और सभी सुविधाओं से युक्त छत मिलती है, तो उसके जीवन से असुरक्षा का भय सदा के लिए समाप्त हो जाता है। बच्चों की शिक्षा में सुधार होता है, संक्रामक बीमारियों का खतरा घटता है और परिवार की आर्थिक उत्पादकता में भारी उछाल आता है। 4 करोड़ से अधिक पक्के मकानों का निर्माण और आगामी 3 करोड़ नए मकानों का संकल्प यह प्रमाणित करता है कि भारत का विकास मॉडल समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की बुनियादी जरूरतों को प्राथमिकता देता है। पक्के मकानों से सशक्त हुआ यह नया भारत आत्मविश्वास, स्वाभिमान और समृद्धि के साथ ‘विकसित भारत 2047’ के महान राष्ट्रीय स्वप्न को साकार करने की दिशा में अग्रसर है।


